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Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 8

Chapter 8: Heredity
Chapter Introduction: 
This chapter covers heredity, Mendel’s laws, and evolution in a structured question–answer format. It helps students develop scientific thinking.

FAQ
Ques. Is this a high-weightage chapter in exams?
Ans. Yes, questions from heredity and evolution carry significant weight in examinations.

CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 8 : आनुवंशिकता

प्रश्न :- आनुवंशिकी से आप क्या समझते है?

उत्तर :- आनुवंशिकी :- वह विज्ञान है जो वंशानुक्रम के माध्यम से लक्षणों के प्रसार और उनके बीच के भेदों का अध्ययन करता है।

उदाहरण :- 

मान लीजिए, एक परिवार में माता-पिता दोनों के पास एक ही आंखों का रंग (नीला) है। इस प्रकार, उनके बच्चों को भी नीली आंखें होने की संभावना रहती है, क्योंकि यह लक्षण वंशानुक्रम के द्वारा संचारित होता है। यह आनुवंशिकी का एक उदाहरण है, जिसमें लक्षण (आंखों का रंग) माता-पिता से बच्चों को प्राप्त होते हैं।

प्रश्न :- आनुवंशिकता क्या है?

उत्तर :- आनुवंशिकता :- विभिन्न लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में सही तरीके से वंशानुगत होना ही आनुवंशिकता कहलाता है।

प्रश्न :- विभिन्नता से आप क्या समझते है?

उत्तर :- विभिन्नता :- एक ही प्रजाति के विभिन्न जीवों के शारीरिक संरचना और डीएनए में भिन्नता को विभिन्नता कहा जाता है।

प्रश्न :- विभिन्नता का महत्व क्यों है और यह जैव विकास में किस प्रकार योगदान करती है?

उत्तर :- विभिन्नता का महत्व :- यदि कोई एक समूह (समष्टि) अपने पर्यावरण के अनुकूल है, परंतु यदि पर्यावरण में कुछ बड़े बदलाव (जैसे तापमान में बदलाव, जल स्तर में बदलाव, आदि) होते हैं, तो उस समूह का पूरी तरह से नष्ट होना संभव है। लेकिन उस समूह में कुछ जीवों में भिन्नताएँ होने पर, उन जीवों के समूह के लिए जीवित रहने की कुछ संभावनाएँ अवश्य बनी रहेंगी। इस प्रकार, विभिन्नताएँ किसी प्रजाति  (समष्टि) की दीर्घकालिक उत्तरजीविता को सुनिश्चित करने में सहायक होती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि विभिन्नता जैविक विकास का एक प्रमुख आधार है।

प्रश्न :- विभिन्नता कितने प्रकार की होती है?

उत्तर :- विभिन्नता दो  प्रकार की होती है :-

1. शारीरिक कोशिका विभिन्नता (Somatic Cell Variation)

2. जनन कोशिका विभिन्नता (Germ Cell Variation) 

प्रश्न :- शारीरिक कोशिका विभिन्नता और जनन कोशिका विभिन्नता में क्या मुख्य अंतर है?

उत्तर :- शारीरिक कोशिका विभिन्नता और जनन कोशिका विभिन्नता में मुख्य अंतर निम्नलिखित है :-

 

विशेषताएँ

शारीरिक कोशिका विभिन्नता

जनन कोशिका विभिन्नता

स्थान

शारीरिक कोशिका में होती है

जनन कोशिका में होती है

अगली पीढ़ी में स्थानान्तरण

स्थानान्तरित नहीं होती

स्थानान्तरित होती है

जैव विकास पर प्रभाव

जैव विकास में सहायक नहीं होती

जैव विकास में सहायक होती है

अन्य नाम

उपार्जित लक्षण

आनुवंशिक लक्षण

उदाहरण

कुत्तों  की पूँछ काटना, कानों में छेद करना

मानव शरीर की लम्बाई, मानव के बालों का रंग 

 

प्रश्न :- विभिन्नताओं का संचयन और जनन में क्या संबंध होता है?

उत्तर :- विभिन्नताएँ, जनन प्रक्रिया के माध्यम से उत्पन्न होती हैं, फिर चाहे वह लैंगिक जनन हो या अलैंगिक जनन हो।

प्रश्न :- अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन में उत्पन्न होने वाली विभिन्नताओं में क्या अंतर होता है?

उत्तर :- अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन में उत्पन्न होने वाली विभिन्नताओं में निम्नलिखित अंतर होता है :-

प्रकार

विवरण

अलैंगिक जनन

1. विभिन्नताएँ कम होती हैं।

2. डी.एन.ए. प्रतिकृति के दौरान कम त्रुटियाँ उत्पन्न होती हैं।

लैंगिक जनन

1. विभिन्नताएँ अपेक्षाकृत अधिक होती है।

2. इन तीन जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है। 

(i) क्रास संकरण 

(ii) गुणसूत्र क्रोमोसोम का विसंयोजन

 (iii)  म्यूटेशन 

प्रश्न :- विभिन्नता के कारण जीवों में किस प्रकार के लाभ उत्पन्न होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- विभिन्नता के लाभ :- प्राकृतिक विभिन्नता/विविधता के कारण जीवों को अलग-अलग प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। 

उदाहरण :-

वे जीव जो उच्च तापमान को सहन कर सकते हैं, उन्हें गर्मी के प्रभाव से बचने की अधिक संभावना रहती है।

नोट :-

पर्यावरणीय तत्वों द्वारा चयनित उचित गुण समय के साथ जैविक विकास की प्रक्रिया को प्रेरित करते और उसका आधार बनाते हैं।

प्रश्न :- मेंडल ने मटर के पौधों के अध्ययन से कौन से मुख्य नियम प्रस्तुत किए, और उनके योगदान को समझाइए।

उत्तर :- मेंडल का योगदान :-

1. मेंडल ने वंशागति के कुछ प्रमुख नियमों की पहचान की।

2. उन्हें आनुवंशिकी का जनक माना जाता है।

3. मेंडल ने मटर के पौधों में विभिन्न लक्षणों का अध्ययन किया, जैसे कि गोल या झुर्रीदार बीज, लंबे या बौने पौधे, और सफेद या बैंगनी फूल।

4. उन्होंने भिन्न-भिन्न लक्षणों वाले मटर के पौधों को चयनित किया, जैसे लंबे पौधे और बौने पौधे, और इनसे प्राप्त संतति में इन लक्षणों के अनुपात की गणना की। 

प्रश्न :- मेंडल ने मटर के पौधों का चयन अपने प्रयोगों के लिए क्यों किया? उनके चयन के कारणों को समझाइए।

उत्तर :- मेंडल ने मटर के पौधों का चयन अपने प्रयोगों के लिए निम्नलिखित कारणों से किया :- 

1. मटर के पौधों में विभिन्न विकल्पी लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

2. मटर का जीवनकाल छोटा होता है, जिससे प्रयोग जल्दी समाप्त होते हैं।

3. मटर के पौधों में सामान्यतः स्वपरागण होता है, लेकिन कृत्रिम रूप से परपरागण भी संभव है।

4. मटर के पौधे एक ही पीढ़ी में बहुत सारे बीज उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न :- एकल संकरण (मोनोहाइब्रिड क्रॉस) से आप क्या समझते है? विस्तार से समझाइए। 

उत्तर :- एकल संकरण (मोनोहाइब्रिड क्रॉस) :- एकल संकरण में दो मटर के पौधों के बीच एक ही विकल्पी लक्षण (जैसे लंबाई) का क्रॉस किया जाता है। 

उदाहरण :-

लंबे पौधों और बौने पौधों के बीच संकरण किया जाता है।

इनका अवलोकन इस प्रकार किया जाता है :-

1. F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबी ऊँचाई के थे, कोई भी पौधा मध्य ऊँचाई का नहीं था। इसका मतलब यह था कि एक लक्षण (लंबाई) दूसरे पर हावी था।

2. F₂ पीढ़ी में 3/4 पौधे लंबे थे और 1/4 पौधे बौने थे।

3. फीनोटाइप अनुपात F₂ में 3:1 था (3 लंबे पौधे, 1 बौना पौधा) और जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 था (TT, Tt, tt)।

निष्कर्ष :-
• TT और Tt दोनों प्रकार के पौधे लंबे होते हैं, जबकि tt बौने होते हैं।
• T जीन की एक ही प्रति पौधों को लंबा बनाने के लिए काफी होती है, जबकि पौधों को बौना बनाने के लिए दोनों ही प्रतियाें का tt होना अनिवार्य होता है।
• T जैसे लक्षण प्रभावी होते हैं, जबकि t जैसे लक्षण अप्रभावी होते हैं।

प्रश्न :- द्वि-संकरण (या विकल्पीय द्वि-संकरण) से आप क्या समझते है? विस्तार से समझाइए। 

उत्तर :- द्वि-संकरण (या विकल्पीय द्वि-संकरण) :- जब मटर के पौधों के दो जोड़ी लक्षणों के मध्य क्रॉस किया जाता है, जैसे कि मटर के पौधों में बीजों के रंग और आकृति के लक्षण। इस प्रकार के क्रॉस में दो जोड़ी लक्षण (जैसे बीज की आकृति और रंग) स्वतंत्र रूप से वंशानुगति करते हैं।

उदाहरण :-

यदि हम मटर के पौधों को क्रॉस करते हैं, जिनमें एक पौधा गोल और पीले बीज वाला है, और दूसरा पौधा झुर्रीदार और हरे बीज वाला है, तो F2 पीढ़ी में प्राप्त परिणाम इस प्रकार होंगे:

1. गोल, पीले बीज : 9

2. गोल, हरे बीज : 3

3. झुर्रीदार, पीले बीज : 3

4. झुर्रीदार, हरे बीज : 1

इस तरह, बीजों की आकृति और रंग में दो अलग-अलग लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगति करते हैं, जो कि द्वि-संकरण के सिद्धांत का उदाहरण है। 

प्रश्न :- मेंडेल के आनुवंशिकता के नियमों में कौन-कौन से सिद्धांत सम्मिलित हैं और उनका क्या महत्व है?

उत्तर :- आनुवंशिकता के सिद्धांत :- मेंडेल ने मटर के पौधों पर किए गए संकरण प्रयोगों के परिणामों के आधार पर कुछ प्रमुख सिद्धांतों का विकास किया, जिन्हें हम मेंडेल के आनुवंशिकता के नियमों के नाम से जानते हैं।

मेंडेल ने आनुवंशिकता के तीन मुख्य नियमों का प्रतिपादन किया, जो इस प्रकार हैं :-

1. प्रभावित का नियम (Law of Dominance)

2. पृथक्करण का नियम / विसंयोजन का नियम (Law of Segregation)

3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) 

प्रश्न :- प्रभावित, पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन के नियमों में क्या अंतर है?

उत्तर :- प्रभावित, पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन के नियमों में निम्नलिखित अंतर है :- 

नियम

विवरण

प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)

जब मेंडेल ने विभिन्न लक्षणों वाले संकर पादपों का संकरण किया, तो उसने पाया कि एक लक्षण दूसरों पर प्रभाव डालता है और वह अभिव्यक्त होता है, जबकि दूसरा लक्षण दबकर रह जाता है। इस लक्षण को अप्रभावी कहा जाता है, और इसे प्रभाविता का नियम कहा गया।

पृथक्करण का नियम / विसंयोजन का नियम (Law of Segregation)

इस नियम के अनुसार, युग्मक निर्माण के दौरान, दोनों विकल्पी (एलेल्स) अलग-अलग हो जाते हैं। इसलिए इसे पृथक्करण का नियम भी कहा जाता है। प्रत्येक युग्मक में केवल एक विकल्पी (एलेल) होता है। इसे युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहा जाता है।

स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)

द्विसंकर संकरण में विभिन्न लक्षणों का वंशानुगति एक-दूसरे से स्वतंत्र होती है। इसका मतलब है कि एक लक्षण का युग्मक दूसरे लक्षण के युग्मक से स्वतंत्र रूप से मिश्रित होता है, और इसका अनुपात 9:3:3:1 होता है।

प्रश्न :- विभिन्न जीवों में लिंग निर्धारण किस प्रकार किया जाता है?

उत्तर :- विभिन्न जीवों में लिंग निर्धारण :- प्रत्येक जीव में लिंग निर्धारण के लिए विभिन्न तंत्र अपनाए जाते हैं। हर प्रजाति में लिंग निर्धारण के लिए अलग-अलग प्रक्रिया होती है।

लिंग निर्धारण के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी है :-

1. कुछ जीवों में लिंग निर्धारण की निर्भरता अंडे के तापमान पर होती है, जैसे कि घोंघा।

2. कुछ जीवों, लिंग निर्धारण जीन या लिंग सूत्र (chromosomes) द्वारा नियंत्रित होता है। जैसे मानव। इसमें महिला का लिंग XX (मादा) और पुरुष का लिंग XY (नर) होता है।

प्रश्न :- मानवों में लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है?

उत्तर :- मानव में लिंग निर्धारण :- मानवों में लिंग निर्धारण की निर्भरता इस बात पर होती है कि बच्चे को पिता से कौन सा गुणसूत्र प्राप्त होता है। सभी बच्चे अपनी माँ से X गुणसूत्र प्राप्त करते हैं, जबकि लिंग निर्धारण पिता पर निर्भर करता है। इस कारण से लड़का अथवा लड़की होने की संभावना 50 प्रतिशत होती है।

1. यदि बच्चे को पिता से X गुणसूत्र प्राप्त होता है, तो वह लड़की होती है।

2. यदि पिता से Y गुणसूत्र प्राप्त होता है, तो बच्चा लड़का होता है।

इस प्रकार, बच्चों का लिंग निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि पिता से X या Y गुणसूत्र में से कौन सा गुणसूत्र बच्चें को मिलता है। 

प्रश्न :- आनुवंशिक लक्षण क्या होते हैं? इसका उदाहरण दें।

उत्तर :- आनुवंशिक लक्षण :- वे गुण होते हैं जिन्हें एक जीव अपने माता-पिता से प्राप्त करता है। यह लक्षण उस जीव के शारीरिक या मानसिक गुण होते हैं।

उदाहरण :-  

मानव के बालों और आँखों का रंग।

प्रश्न :- आनुवंशिक लक्षण के गुण क्या होते हैं? इसके उदाहरण के साथ समझाइए।

उत्तर :- आनुवंशिक लक्षण के गुण :-

1. ये लक्षण जीवों को उनके माता-पिता से वंशानुगत रूप से प्राप्त होते हैं।

2. ये जनन कोशिकाओं में होते हैं और ये लक्षण अगली पीढ़ी को प्राप्त होते हैं।

3. ये जैविक विकास में योगदान करते हैं। 

उदाहरण :-

मानव के बालों और आँखों का रंग। 

प्रश्न :- आनुवंशिक विचलन के क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर :- आनुवंशिक विचलन के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं :- 

1. यदि DNA में पर्याप्त बदलाव होते हैं।

2. गुणसूत्रों की संख्या में कोई बदलाव आ जाता है।

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