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Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 7

Chapter 7: How Do Organisms Reproduce
Chapter Introduction: 
This chapter explains sexual and asexual reproduction in organisms using simple questions and answers. It is an important chapter from an examination point of view.

FAQ
Ques. Are short-answer questions asked from this chapter?
Ans. Yes, many short-answer questions are asked from reproduction-related topics.

CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 7 : जीव जनन कैसे करते हैं

प्रश्न :- जनन से आप क्या समझते है?

उत्तर :- जनन :- एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सभी जीव अपने समान नए जीवन का निर्माण करते हैं। यह पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता के लिए अति आवश्यक है।

जनन प्रक्रिया जीवों के अस्तित्व को बनाए रखता है। इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य डी.एन.ए. का पुनर्निर्माण करना (प्रतिकृति बनाना) होता है, साथ ही साथ इसमें अन्य दूसरे कोशिकाओं का निर्माण भी होता है।

उदाहरण :-  

1. मानव में जनन

2. पौधों में जनन

3. बैक्टीरिया में जनन

प्रश्न :- डी० एन० ए० की प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है? समझाइए।

उत्तर :- डी.एन.ए. :- वास्तव में, कोशिका के केन्द्रक में स्थित गुणसूत्रों के डी.एन.ए. अणु आनुवांशिक गुणों का संदेश लेकर जनक से उसकी संतति में स्थानांतरित करते हैं। डी.एन.ए. की प्रतिकृति भी पूरी तरह से त्रुटिरहित नहीं होती। इसमें कुछ भिन्नताएं उत्पन्न होती हैं, जिनमें से कुछ ऐच्छिक भिन्नताएं ही संतति में समाविष्ट हो पाती हैं।

प्रश्न :- विभिन्नता का महत्व क्यों है और यह जैव विकास में किस प्रकार योगदान करती है?

उत्तर :- विभिन्नता का महत्व :- यदि कोई एक समूह (समष्टि) अपने पर्यावरण के अनुकूल है, परंतु यदि पर्यावरण में कुछ बड़े बदलाव (जैसे तापमान में बदलाव, जल स्तर में बदलाव, आदि) होते हैं, तो उस समूह का पूरी तरह से नष्ट होना संभव है। लेकिन उस समूह में कुछ जीवों में भिन्नताएँ होने पर, उन जीवों के समूह के लिए जीवित रहने की कुछ संभावनाएँ अवश्य बनी रहेंगी। इस प्रकार, विभिन्नताएँ किसी प्रजाति  (समष्टि) की दीर्घकालिक उत्तरजीविता को सुनिश्चित करने में सहायक होती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि विभिन्नता जैविक विकास का एक प्रमुख आधार है।

प्रश्न :- प्रजनन कितने प्रकार के होते हैं? विस्तार से समझाइए।

उत्तर :- प्रजनन दो प्रकार के होते है :-

1. अलैंगिक प्रजनन :- यह वह प्रक्रिया है जिसमें केवल एकल जीव भाग लेते है। इसमें बिना किसी लिंग भेद के एक ही जीव से नए जीवों का निर्माण होता है। इसे अलैंगिक प्रजनन कहते हैं।

उदाहरण :- 

बैक्टीरिया, हाइड्रा

2. लैंगिक प्रजनन :- यह वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा दोनों भाग लेते हैं। इसमें दोनों लिंगों के युग्म से नए जीवों का निर्माण होता है। इसे लैंगिक प्रजनन कहते हैं।

उदाहरण :- 

मनुष्य, पक्षी

प्रश्न :- प्रजनन के अलैंगिक और लैंगिक प्रकारों में क्या अंतर है? इन्हें विस्तार से समझाइए।

उत्तर :- प्रजनन के अलैंगिक और लैंगिक प्रकारों में निम्नलिखित अंतर है :- 

अलैंगिक प्रजनन

लैंगिक प्रजनन

एकल जीवों  द्वारा नए जीवों का निर्माण होता है।

दो एकल जीव (1 नर तथा 1 मादा) के मिलन से नये जीव का निर्माण होता है।

युग्मक का निर्माण नहीं करता है।

नर युग्मक तथा मादा युग्मक का निर्माण होता है।

नया जीव पूरी तरह से पैतृक जीव के समान तथा समरूप  होता है।

आनुवांशिक रूप से नया जीव पैतृक जीवों से मिलता-जुलता (समान) तो होता है, लेकिन समरूप नहीं होता।

यह सतत् गुणन के लिए उपयुक्त है।

यह प्रजाति (समष्टि) में विभिन्नताओं का निर्माण करने में सहायक होता है।

यह मुख्य रूप से निम्न वर्ग के जीवों में होता है।

यह मुख्य रूप से उच्च वर्ग के जीवों में पाया जाता है।

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर :- अलैंगिक प्रजनन की निम्नलिखित विधियाँ हैं :- 

1. विखंडन (Fission)

2. खंडन (Fragmentation)

3. पुनरुद्भवन (पुनर्जनन) (Regeneration)

4. मुकुलन (Budding)

5. बीजाणु समासंघ (Spore Formation)

6. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)

नोट :-

विखंडन (Fission) अलैंगिक प्रजनन दो तरह के होते है :- 

1. द्विविखंडन (Binary Fission)

2. बहुखंडन (Multiple Fission)

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधि विखंडन (Fission) को समझाइए।

उत्तर :- विखंडन (Fission) :- यह एक प्रजनन प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत एक मूल कोशिका अपनी संरचना को तोड़कर दो या उससे अधिक संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है।

इसके दो प्रकार निम्नलिखित है :-

1. द्विविखंडन (Binary Fission) :- इस प्रक्रिया में एक जीव केवल दो कोशिकाओं में विभाजित होता है।
उदाहरण :-

लेस्मानिया तथा अमीबा। 

2. बहुखंडन (Multiple Fission) :- यह प्रक्रिया उस समय होती है जब एक जीव अपनी कोशिका को कई हिस्सों में विभाजित करता है।
उदाहरण :-

प्लाज्मोडियम (मलेरिया के कीटाणु)।

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधि खंडन (Fragmentation) को समझाइए।

उत्तर :- खंडन (Fragmentation) :- यह प्रजनन विधि उस समय होती है जब बहुकोशिकीय जीव अपनी संरचना में खंडित होकर छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाते हैं। इन टुकड़ों में वृद्धि होती है, और वे एक नए जीव के रूप में विकसित हो जाते हैं।

उदाहरण :-

स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधि पुनरुद्भवन (पुनर्जनन) (Regeneration) को समझाइए।

उत्तर :- पुनरुद्भवन (पुनर्जनन) (Regeneration) :- इस प्रक्रिया में जब कोई जीव किसी वजह से टूटकर कई टुकड़ों में विभाजित हो जाता है, तब प्रत्येक टुकड़ा एक नया जीव बनाने के रूप में विकसित हो जाता है।

उदाहरण :-

हाइड्रा तथा प्लेनेरिया।

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधि मुकुलन (Budding) को समझाइए।

उत्तर :- मुकुलन (Budding) :-  इस प्रक्रिया में जीव के शरीर पर एक छोटा सा उभार (मुकुल) बनता है, जो धीरे-धीरे विकसित होकर एक स्वतंत्र जीव के रूप में जनक से अलग हो जाता है। और इस प्रक्रिया का पालन करते हैं।

उदाहरण :-

यीस्ट (खमीर) तथा हाइड्रा।

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधि बीजाणु समासंघ (Spore Aggregation) को समझाइए।

उत्तर :- बीजाणु समासंघ (Spore Aggregation) :- कुछ जीवों के तंतुओं के अंत में बीजाणु धानी उत्पन्न होती है, जिसमें बीजाणु पाए जाते हैं। ये बीजाणु गोल आकार के होते हैं और एक मोटी परत से संरक्षित रहते हैं। जब इन बीजाणुओं को अनुकूल परिस्थितियाँ मिलती हैं, तो वे वृद्धि करने लगते हैं।

उदाहरण :-

राइज़ोपस (Rhizopus) तथा  मूकोर (Mucor)।

प्रश्न :- अलैंगिक प्रजनन की विधि कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) को समझाइए।

उत्तर :- कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) :- कुछ पौधों के द्वारा नए पौधे का निर्माण उनके शरीर के ही भागों (कायिक भागों) जैसे जड़, तना, पत्तियाँ आदि से होता है। इस प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहा जाता है

उदाहरण :-

राइज़ोपस (Rhizopus) तथा  मूकोर (Mucor)।

प्रश्न :- कायिक प्रवर्धन की कौन सी प्राकृतिक विधियाँ होती हैं?

उत्तर :- कायिक प्रवर्धन की प्राकृतिक विधियाँ निम्नलिखित है :- 

प्राकृतिक विधि

उदाहरण

जड़ द्वारा प्रवर्धन

कुछ पौधों में जैसे उहेलिया और शकरकंदी, नए पौधे जड़ से उत्पन्न होते हैं।

तने द्वारा प्रवर्धन

आलू और अदरक जैसे पौधों में तने के द्वारा नए पौधे बनते हैं।

पत्तियों द्वारा प्रवर्धन

ब्रायोफिलम जैसे पौधों की पत्तियों में कलिकाएँ उत्पन्न होती हैं, जो बाद में नए पौधों में परिवर्तित हो जाती हैं।

प्रश्न :- कायिक प्रवर्धन की कृत्रिम विधियाँ कौन सी होती हैं?

उत्तर :- कायिक प्रवर्धन की कृत्रिम विधियाँ निम्नलिखित है :- 

कृत्रिम विधि

उदाहरण

रोपण

पौधों को उनके भागों से नया पौधा उगाना, जैसे आम।

कर्तन

पौधों के तने के भाग को काटकर नया पौधा उगाना, जैसे गुलाब।

लेयरिंग

पौधों के तने को मिट्टी में दबाकर नए पौधे का निर्माण करना, जैसे चमेली

ऊतक संवर्धन

पौधे के ऊतक (सेल) से नया पौधा विकसित करना, जैसे आर्किड और सजावटी पौधे।

प्रश्न :- कायिक संवर्धन के क्या लाभ होते हैं?

उत्तर :- कायिक संवर्धन के निम्नलिखित लाभ होते हैं :-

1. बीज से न उत्पन्न होने वाले पौधों, जैसे केला और गुलाब, से नए पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं। यह पौधों की किस्मों को बनाए रखने में मदद करता है।

2. इस प्रक्रिया से उत्पन्न नए पौधे अपने जनक के आनुवंशिक गुणों को समान रूप से प्राप्त करते हैं। इससे उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का उत्पादन होता है।

3. यह बीज रहित फलों के उत्पादन में सहायक होती है। यह विधि तेज़ी से और अधिक पौधे उत्पन्न करने में सक्षम होती है।

4. यह पौधों को उगाने का एक सरल और किफायती तरीका है। यह विधि फसल की गुणवत्ता को बनाए रखने में सहायक होती है।

प्रश्न :- ऊतक संवर्धन विधि का क्या महत्व है और इसे किस प्रकार के पौधों के लिए उपयोगी माना जाता है?

उत्तर :- ऊतक संवर्धन :- एक जैविक प्रक्रिया है, जिसमें पौधे के किसी हिस्से से कोशिकाओं को लेकर उन्हें विशेष पोषक माध्यमों में रखा जाता है। यहाँ इन कोशिकाओं का विभाजन तथा वृद्धि होती है, जिससे कैलस (कोशिकाओं का गुच्छा) का निर्माण होता है। फिर, इन कैलस को एक हॉर्मोनल माध्यम के अन्दर रखा जाता है, जहां से विभेदन प्रक्रिया का आरंभ होता है और नए पौधे उत्पन्न होते है। 

उदाहरण :-

आर्किड्स और सजावटी पौधे।

प्रश्न :- द्विखण्डन और बहुखण्डन में क्या अन्तर है? दोनों के उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

उत्तर :- द्विखण्डन और बहुखण्डन में अन्तर  निम्नलिखित है :- 

विशेषताएँ

द्विखण्डन

बहुखण्डन

परिस्थितियाँ

अनुकूल परिस्थितियाँ

प्रतिकूल परिस्थितियाँ

विभाजन प्रक्रिया

केन्द्रक दो भागों (पुत्री केन्द्रकों) में विभाजित होता है।

केन्द्रक कई भागों (संतति केन्द्रकों) में विभाजित होता है।

कोशाद्रव्य का बँटवारा

कोशाद्रव्य का बँटवारा केन्द्रक विभाजन के साथ होता है।

कोशाद्रव्य केन्द्रक विभाजन के बाद विभिन्न भागों में बाँटा जाता है।

प्रकार

एककोशिकीय जीव से दो सन्तति जीवो का निर्माण होता हैं।

एककोशिकीय जीव से कई सन्तति जीवों का निर्माण होता हैं।

उदाहरण

अमीबा (Amoeba)

प्लाज्मोडियम ((Amoeba))

प्रश्न :- लैंगिक प्रजनन क्या है? इसके द्वारा उत्पन्न होने वाली संतति में किस प्रकार की विशेषता होती है?

उत्तर :- लैंगिक प्रजनन :- इस प्रकार के प्रजनन में नए जीवों का निर्माण करने के लिए नर और मादा दोनों की भागीदारी अनिवार्य होती है। इसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि संतति उत्पन्न करने के लिए दोनों लिंगों का योगदान आवश्यक होता है। अर्थात्  लैंगिक प्रजनन तब होता है जब नर और मादा युग्मकों का मिलन होता है।

विशेषता :-

इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप संतति में भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।

नोट :- 

नर और मादा युग्मकों के मिलन को निषेचन कहा जाता है।

प्रश्न :- डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनाना जनन हेतु क्यों आवश्यक है?

उत्तर :- डी.एन.ए. :- जनन की प्रक्रिया में डी.एन.ए. का प्रतिकृतिकरण करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के द्वारा नए जीवन का निर्माण होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि जीवधारी की संरचना वही बनी रहती है। इसके परिणामस्वरूप, जीवधारी अपनी उत्पत्ति और पर्यावरण के अनुसार अनुकूलित रहता है।

प्रश्न :- पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन के अंग कौन से होते हैं और इनका कार्य क्या है?

उत्तर :- पुष्पी पौधे :- आवृतबीजी (एंजियोस्पर्म) पौधों के जनन अंग पुष्प में स्थित होते हैं।  इनमें बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर और स्त्रीकेसर शामिल हैं। पुंकेसर और स्त्रीकेसर ही पुष्प के जनन अंग होते हैं, जिनमें जनन कोशिकाएँ स्थित होती हैं।

प्रश्न :- फूलों के कौन-कौन से प्रकार होते हैं? इन दोनों प्रकारों में क्या अंतर होता है?  उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

उत्तर :- फूलों के दो प्रमुख प्रकार होते हैं :-

1. एकलिंगी पुष्प

2. उभयलिंगी पुष्प

एकलिंगी पुष्प तथा उभयलिंगी पुष्प में अंतर निम्नलिखित है :- 

प्रकार

विवरण

उदाहरण

एकलिंगी पुष्प

इन पुष्प में केवल एक जननांग (पुंकेसर या स्त्रीकेसर) होता है।

पपीता तथा तरबूज

उभयलिंगी पुष्प

इन पुष्प में दोनों जननांग (पुंकेसर और स्त्रीकेसर) होते हैं।

गुड़हल तथा  सरसों

प्रश्न :- बीज निर्माण की प्रक्रिया के प्रमुख चरणों को क्रमबद्ध तरीके से समझाइए।

उत्तर :- बीज निर्माण की प्रक्रिया के प्रमुख चरण निम्नलिखित है :- 

1. परागकण का स्थानांतरण :- परागकोश में उत्पन्न परागकण वायु, जल अथवा जन्तुओं के द्वारा उसी फूल के वर्तिकाग्र (स्वपरागण) अथवा अन्य दूसरे फूलों के वर्तिकाग्र (परपरागण) पर पहुँचते हैं।

2. परागनलिका का विकास :- परागकण से एक परागनलिका का विकस होता है, जो वर्तिका से गुजरते हुए बीजांड तक पहुँचती है।

3. निषेचन :- अंडाशय में नर और मादा युग्मक का निषेचन होता है, जिसके परिणामस्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है।

4. विभाजन और भ्रूण का निर्माण :- युग्मनज में विभाजन होता है और  भ्रूण का निर्माण होता है।

5. बीज का निर्माण :- बीजांड द्वारा एक कठोर आवरण का विकस होता है जो बााद में बीज में बदल जाता है।

6. फल का विकास :- अंडाशय एक फल में बन जाता है और फूल के अन्य भाग झड़ने लगते हैं।

प्रश्न :- अंकुरण क्या है? इसे स्पष्ट रूप से समझाइए।

उत्तर :- अंकुरण :- बीज (जो भविष्य में पौधा बनेगा) या भ्रूण, जब उपयुक्त परिस्थितियों में विकसित होता है तथा नए पौधे के रूप में उभरता है, तो इस प्रक्रिया को अंकुरण कहा जाता है।

प्रश्न :- परागण और निषेचन में क्या अंतर है? उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

उत्तर :-  परागण और निषेचन में अंतर निम्नलिखित है :-  

विषय

परागण

निषेचन

परिभाषा

पराग कणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहा जाता है।

नर और मादा युग्मकों का मिलकर नया युग्मज बनाना निषेचन कहलाता है।

प्रक्रिया

परागण में पराग कणों का स्थानांतरण होता है।

निषेचन में नर और मादा युग्मकों का मिलन होता है, जिससे नया जीवन उत्पन्न होता है।

माध्यम

यह प्रक्रिया हवा, पानी, कीट, पक्षी आदि के द्वारा होती है।

उच्च पादपों में यह कार्य परागनलिका द्वारा संपन्न होता है।

समय

परागण निषेचन से पहले ही होता है।

निषेचन परागण के बाद ही होता है।

प्रश्न :- मानवों में प्रजनन कैसे होता है?

उत्तर :- मानवों में प्रजनन की प्रक्रिया लैंगिक जनन के द्वारा होती है, जिसमें नर और मादा युग्मकों का मिलन होता है।

प्रश्न :- लैंगिक परिपक्वता क्या है?

उत्तर :- लैंगिक परिपक्वता :- वह समय जब व्यक्ति के शरीर में यौनिक विकास की प्रक्रिया शुरू होती है, और नर में शुक्राणु तथा मादा में अंड कोशिका का निर्माण प्रारंभ होता है, उसे लैंगिक परिपक्वता कहते हैं। इस अवधि को किशोरावस्था में योवनारंभ भी कहा जाता है।

प्रश्न :- यौवनारंभ में होने वाले सामान्य परिवर्तन क्या होते हैं?

उत्तर :- यौवनारंभ में होने वाले सामान्य परिवर्तन निम्नलिखित है :-

प्रकार

परिवर्तन

किशोरों में

• कांख तथा जननांग के पास घने बालों का उगना।

• त्वचा का तैलीय हो जाना और मुँहासो का निकलना।

लड़कियों में

• स्तन का आकार बढ़ने लगना।

• रजोधर्म का आरंभ होना।

लड़कों में

• चेहरे पर दाढ़ी और मूंछ का उगना।

• आवाज में बदलाव, यानी आवाज का फटना।

सारांश

ये सभी परिवर्तन इस बात के संकेत हैं कि व्यक्ति लैंगिक परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है।

प्रश्न :- नर जनन तंत्र क्या है?

उत्तर :- नर जनन तंत्र में वे अंग शामिल होते हैं जो जनन कोशिकाओं का उत्पादन करते हैं और उन कोशिकाओं को निषेचन स्थल तक पहुँचाते हैं। इन अंगों का संयुक्त कार्य ही नर जनन तंत्र का निर्माण करता है।

प्रश्न :- नर जनन तंत्र के प्रमुख अंग और उनके कार्य क्या हैं?

उत्तर :- नर जनन तंत्र के प्रमुख अंग और उनके कार्य निम्नलिखित है :- 

अंग

कार्य

नर जनन तंत्र

जनन कोशिका उत्पादक अंग और निषेचन स्थल तक कोशिकाओं को पहुँचाने वाले अंगों का संयुक्त तंत्र।

वृषण

शुक्राणु का निर्माण वृषण में होता है, जो शरीर के तापमान से कम तापमान पर स्थित होते हैं। वृषण ग्रंथि टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन उत्पन्न करती है।

टेस्टोस्टेरॉन

1. शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है।

2. लड़कों में यौवनावस्था के परिवर्तन लाता है।

शुक्रवाहिनी

शुक्राणुओं का मोचन (Ejaculation) शुक्रवाहिनियों द्वारा होता है, जो मूत्राशय से आने वाली नली से जुड़ जाती है, और एक संयुक्त नली का निर्माण करती हैं।

मूत्रमार्ग

मूत्र और वीर्य दोनों के बाहर जाने का मार्ग। इसे शिश्न के बाहरी आवरण के रूप में जाना जाता है।

संबंधित ग्रंथियाँ

शुक्राशय और प्रोस्ट्रेट ग्रंथियाँ अपने स्राव को शुक्रवाहिनी में डालती हैं, जिससे शुक्राणु तरल माध्यम में आते हैं। यह माध्यम शुक्राणुओं को पोषण और स्थानांतरण में सहायता करता है, और मिलकर वीर्य का निर्माण करते हैं।

प्रश्न :- मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंग और उनके कार्य क्या हैं?

उत्तर :- मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंग और उनके कार्य निम्नलिखित है :- 

अंग

कार्य

अंडाशय

1. अंडाशय में मादा युग्मक या अंड कोशिका का निर्माण होता है।

2. लड़की के जन्म के समय से ही अंडाशय में अपरिपक्व अंड (हजारों) होते हैं।

3. यौवनारंभ के बाद कुछ अंड परिपक्व होते हैं।

4. प्रत्येक महीने अंडाशय द्वारा एक परिपक्व अंड उत्पन्न होता है।

5. अंडाशय एस्ट्रोजन और प्रोजैस्ट्रोन हार्मोन का निर्माण करता है।

अंडवाहिका (फेलोपियन ट्यूब)

1. अंडाशय से उत्पन्न अंड कोशिका को गर्भाशय तक पहुँचाती है।

2. इस स्थान पर अंड कोशिका और शुक्राणु का निषेचन होता है।

गर्भाशय

1. गर्भाशय एक थैलीनुमा संरचना होती है, जहाँ शिशु का विकास होता है।

2. गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से योनि से जुड़ा होता है।

प्रश्न :- अंड कोशिका का निषेचन होने पर क्या होता है?

उत्तर :- जब अंड कोशिका का निषेचन होता है, तो निषेचित अंड को युग्मनज कहा जाता है, जिसे गर्भाशय में रोपित किया जाता है। गर्भाशय में रोपण के बाद, युग्मनज में विभाजन और विभेदन की प्रक्रिया होती है, जिसके परिणामस्वरूप भ्रूण का निर्माण होता है।

प्रश्न :- जब अंड कोशिका का निषेचन नहीं होता है, तो क्या प्रक्रिया होती है?

उत्तर :- जब अंड कोशिका का निषेचन नहीं होता है, तो निम्नलिखित प्रक्रिया होती है :-

1. हर महीने निषेचित अंड प्राप्त करने के लिए गर्भाशय खुद को तैयार करता है। 

2. गर्भाशय की भित्ति मांसल और स्पंजी बन जाती है, जो भ्रूण के विकास हेतु आवश्यक होती है।
3. निषेचन नहीं होने पर यह भित्ति आवश्यक नहीं रह जाती है, और धीरे-धीरे टूटकर रक्त और म्यूकस के रूप में योनि के मार्ग से बाहर निकल जाती है।
3. यह चक्र लगभग एक महीने में पूरा होता है, और इसे ऋतुस्राव या रजोधर्म कहा जाता है।
4. 40 से 50 वर्ष की उम्र के पश्चात अंडाशय से अंड का निर्माण होना बंद हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप रजोधर्म समाप्त हो जाता है, इसे रजोनिवृति कहा जाता है।

प्रश्न :- प्लेसेंटा क्या है और इसका गर्भावस्था में क्या कार्य है?

उत्तर :- प्लेसेंटा एक विशेष प्रकार का ऊतक है, जो गर्भाशय में एक तश्तरी जैसी बनावट में स्थित होता है।

प्लेसेंटा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है :-

1. माँ के रक्त से भ्रूण को पोषक तत्व जैसे ग्लूकोज और ऑक्सीजन प्रदान करना।

2. भ्रूण द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों को हटाना।

प्रश्न :- गर्भकाल क्या होता है और इसकी अवधि कितनी होती है?

उत्तर :- गर्भकाल :- वह अवधि है जो अंडाणु के निषेचन से लेकर शिशु के जन्म तक होती है। यह सामान्यत: लगभग 9 महीने की होती है।

 

प्रश्न :- जनन स्वास्थ्य का क्या अर्थ है?

प्रश्न :- कौन से रोग लैंगिक संचरण के माध्यम से फैल सकते हैं, और कंडोम का उपयोग इनसे कैसे बचाव कर सकता है?

उत्तर :- ऐसे कई रोग होते हैं, जो लैंगिक संबंधों के माध्यम से फैल सकते हैं,

उदाहरण :-

1. बैक्टीरियल संक्रमण: सिफलिस, गोनेरिया

2. वायरल संक्रमण: HIV-AIDS, मस्सा (warts)

कंडोम का उपयोग इन रोगों के संचरण को कुछ हद तक रोक सकता है।

प्रश्न :- गर्भरोधन का क्या अर्थ है?

उत्तर :- गर्भधारण को रोकने की प्रक्रिया को गर्भरोधन कहते हैं।

प्रश्न :- गर्भरोधन के कौन-कौन से प्रकार होते हैं और प्रत्येक विधि में क्या किया जाता है?

उत्तर :- गर्भरोधन के निम्नलिखित  प्रकार होते हैं :- 

प्रकार

विवरण

यांत्रिक अवरोध

शुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुँचने से रोकने वाली विधियाँ। 

उदाहरण :-

कंडोम (पुरुषों के लिए), सर्वाइकल कैप (महिलाओं के लिए)।

रासायनिक तकनीक

यह विधि दवाइयों के माध्यम से अंडाणु के उत्पादन को रोकने के लिए हॉर्मोनल संतुलन में बदलाव करती है। 

इसके कुछ विपरीत प्रभाव भी होते हैं।

IUCD (Intra Uterine Contraceptive Device)

गर्भाशय में लूप या कॉपर-टी डालने से गर्भधारण को रोका जाता है।

शल्यक्रिया तकनीक

1. नसबंधी (Vasectomy): पुरुषों में शुक्रवाहिकाओं को ब्लॉक करके शुक्राणुओं के स्थानांतरण को रोक देना।

2. ट्यूबेक्टोमी (Tubectomy): महिलाओं में अंडवाहिनी को अवरुद्ध करके अंड के स्थानांतरण को रोक देना।।

प्रश्न :- भ्रूण हत्या क्या है, और स्वस्थ समाज के लिए लिंग अनुपात का संतुलन क्यों आवश्यक है?

उत्तर :- भ्रूण हत्या :- जब मादा भ्रूण को गर्भाशय में ही नष्ट कर दिया जाता है, तो इसे भ्रूण हत्या कहा जाता है।

लिंग अनुपात का संतुलन एक स्वस्थ समाज के लिए बहुत आवश्यक है, और यह तभी संभव है जब लोग भ्रूण हत्या और भ्रूण लिंग निर्धारण जैसी प्रथाओं के बारे में जागरूक हों और इन्हें रोका जाए।

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