Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 1
Chapter 1: Matter in Our Surroundings
Chapter Introduction:
This chapter explains the physical nature of matter, its states, and the changes between different states. The questions and answers are prepared according to the NCERT syllabus and help students understand basic concepts of Chemistry in a simple way.
FAQ
Ques. Why is this chapter important for Class 9 students?
Ans. This chapter builds the foundation for understanding matter and its behavior, which is essential for higher classes.
CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 1 : हमारे आस-पास के पदार्थ
प्रश्न :- पदार्थ किसे कहते हैं?
उत्तर :- पदार्थ :- वह सामग्री है जिससे कोई वस्तु बनी होती है। यह स्थान घेरता है और इसका द्रव्यमान होता है।
हमारे चारों ओर की सभी वस्तुएँ किसी न किसी पदार्थ से बनी होती हैं।
प्रश्न :- पदार्थ के कणों के भौतिक गुणों को समझाइए।
उत्तर :- पदार्थ के कणों के भौतिक गुण निम्नलिखित है:-
1. पदार्थ बहुत छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है।
2. यह कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें बिना सूक्ष्मदर्शी (microscope) के देख पाना मुश्किल होता है।
3. पदार्थ सतत नहीं होता, बल्कि यह कणों के समूह से बना होता है।
प्रश्न :- पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुणों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- पदार्थ के कणों के अभिलाक्षणिक गुण निम्नलिखित है:-
1. वे हमेशा गति करते रहते हैं, जिससे यह पता चलता है कि उनमें गतिज ऊर्जा होती है।
2. कणों के बीच कुछ रिक्त स्थान होता है, जो दर्शाता है कि वे पूरी तरह से जुड़े नहीं होते।
3. ये कण एक-दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, यानी उनके बीच आकर्षण बल होता है।
उदाहरण :-
अगर हम परफ्यूम या अगरबत्ती जलाएँ, तो उसकी खुशबू कुछ समय में दूर तक फैल जाती है, जो यह दर्शाती है कि कण गति कर रहे हैं और उनके बीच रिक्त स्थान है।
प्रश्न :- पदार्थ की भौतिक अवस्थाओं को समझाइए।
उत्तर :- पदार्थ की तीन प्रमुख भौतिक अवस्थाएँ निम्नलिखित है :-
1. ठोस अवस्था (Solid), 2. द्रव अवस्था (Liquid) तथा 3. गैसीय अवस्था (Gas)
1. ठोस अवस्था (Solid) :- इसमें कण एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं और उनका आपसी आकर्षण बहुत अधिक होता है।
उदाहरण :-
2. द्रव अवस्था (Liquid) :- इसमें कण एक-दूसरे से थोड़ी दूरी पर होते हैं और थोड़ी गति करते हैं।
उदाहरण :-
द्रव: पानी, दूध
3. गैसीय अवस्था (Gas) :- गैस के कण बहुत दूर-दूर होते हैं और स्वतंत्र रूप से इधर-उधर गति करते हैं।
उदाहरण :-
गैस: ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड
प्रश्न :- मानव शरीर को पदार्थ की तीन अवस्थाओं द्वारा समझाइए।
उत्तर :- मानव शरीर में भी पदार्थ की तीन अवस्थाएँ देखने को मिलती हैं:
1. ठोस अवस्था :- हड्डियाँ और दाँत
2. द्रव अवस्था :- रक्त और शरीर का जल
3. गैसीय अवस्था :- फेफड़ों में मौजूद हवा
इन उदाहरणों से यह समझ आता है कि पदार्थ की तीनों अवस्थाएँ हमारे शरीर में भी मौजूद होती हैं।
प्रश्न :- ठोस अवस्था के प्रमुख गुणों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- ठोस अवस्था के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं :-
1. ठोस पदार्थों का आकार निश्चित होता है, ये बिना बाहरी बल के अपना आकार नहीं बदलते हैं।
2. इनकी सीमाएँ स्पष्ट और पहचानने योग्य होती हैं।
3. इनका आयतन निश्चित होता है, यानी ये आसानी से न तो फैलते हैं और न ही सिकुड़ते हैं।
4. ठोस की संपीड्यता बहुत कम/नगण्य होती है, इन्हें दबाकर छोटा करना मुश्किल होता है।
5. ये आमतौर पर कठोर और दृढ़ होते हैं।
उदाहरण :-
लकड़ी की मेज़ या लोहे की छड़ का आकार और आयतन हमेशा एक जैसा रहता है। इन्हें हाथ से दबाकर छोटा नहीं किया जा सकता, जिससे पता चलता है कि यह एक ठोस अवस्था है।
प्रश्न :- द्रव अवस्था के मुख्य गुणों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- द्रव अवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. द्रव पदार्थ तरल होते हैं और उनमें बहाव की प्रवृत्ति होती है।
2. इनका कोई स्थायी आकार नहीं होता, बल्कि ये जिस पात्र में डाले जाते हैं, उसी का आकार ग्रहण कर लेते हैं।
3. लेकिन इनका आयतन निश्चित होता है, यानी यह बिना किसी दबाव के बदलता नहीं हैं।
4. द्रवों में कम संपीडन होने के कारण द्रवों को बहुत कम मात्रा में ही संपीडित किया जा सकता है।
उदाहरण :-
पानी को आप किसी भी बर्तन में डालें — चाहे वह ग्लास हो या बोतल — वह उसी के अनुसार आकार ले लेता है, लेकिन उसकी मात्रा (आयतन) वही रहती है।
प्रश्न :- गैसीय अवस्था के मुख्य गुणों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- गैसीय अवस्था के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं :-
1. गैसों में बहाव की प्रवृत्ति होती है, यानी ये चारों ओर आसानी से फैलती हैं।
2. इन्हें बहुत अधिक दबाकर छोटे स्थान में समेटा जा सकता है, जिससे यह पता चलता है कि इनकी संपीड्यता अधिक होती है।
3. गैसों की कोई निश्चित सीमाएँ नहीं होतीं, वे किसी भी दिशा में फैल सकती हैं।
4. इनका आकार तय नहीं होता, बल्कि यह उस स्थान का रूप ले लेती हैं जिसमें वे मौजूद होती हैं।
5. गैसों का आयतन भी निश्चित नहीं होता, यह बाहरी परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।
उदाहरण :-
अगर आप एयर फ्रेशनर स्प्रे करते हैं, तो उसकी खुशबू कमरे के हर कोने में पहुँच जाती है। यह दर्शाता है कि गैसें फैल सकती हैं, उनका आकार और आयतन तय नहीं होता।
प्रश्न :- पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर :- पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन तापमान और दाब के अनुसार होता है।
किसी भी पदार्थ की अवस्था तब बदलती है जब उसके कणों की गति और आपसी दूरी में बदलाव आता है।
उदाहरण :-
पानी इसका सबसे सरल उदाहरण है:
1. ठोस रूप में – बर्फ :- जब पानी को ठंडा किया जाता है, तो यह बर्फ (ठोस) बन जाता है।
2. द्रव रूप में – जल :- सामान्य तापमान पर यह द्रव (जल) अवस्था में रहता है।
3. गैसीय रूप में – भाप या वाष्प :- गरम करने पर यह भाप (गैस) में बदल जाता है।
नोट :-
यह परिवर्तन पदार्थ के कणों की गतिज ऊर्जा और आकर्षण बल पर निर्भर करता है।
प्रश्न :- पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन किन दो तरीकों से किया जा सकता है?
उत्तर :- पदार्थ की भौतिक अवस्था को निम्नलिखित दो तरीकों से बदला जा सकता है :-
1. तापमान में परिवर्तन करके
2. दाब में परिवर्तन करके
प्रश्न :- तापमान में परिवर्तन से पदार्थ की अवस्था किस प्रकार बदलती है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- तापमान में परिवर्तन करने से पदार्थ की अवस्था में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव आता है।
प्रक्रिया / गुण | विवरण | उदाहरण |
गलनांक | वह तापमान जिस पर कोई ठोस पिघलकर द्रव बनता है। | बर्फ का गलनांक = 0°C या 273 K |
संगलन की गुप्त ऊष्मा | वह ऊष्मा जो 1 किग्रा. ठोस को बिना तापमान बढ़ाए द्रव में बदल देती है। 0°C पर बर्फ और 0°C पर पानी — दोनों का तापमान समान होता है, लेकिन पानी के कणों में ऊर्जा अधिक होती है। | 0°C पर बर्फ → 0°C पर पानी |
क्वथनांक | वह तापमान जिस पर द्रव उबलकर गैस बनता है। | पानी का क्वथनांक = 100°C या 373K |
वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा | जब पानी 100°C पर उबलता है, उस समय उसका तापमान और नहीं बढ़ता क्योंकि दी गई ऊष्मा का उपयोग कणों के बीच के आकर्षण बल को तोड़ने में होता है। इसलिए 100°C पर भाप के कणों में पानी के कणों की अपेक्षा अधिक ऊर्जा होती है। | पानी → भाप |
ऊर्ध्वपातन | कुछ पदार्थ बिना द्रव बने, सीधे ठोस से गैस और गैस से ठोस में बदल जाते हैं। | कपूर, नैफ्थलीन |
नोट :-
तापमान में परिवर्तन पदार्थ के कणों की गति और ऊर्जा को प्रभावित करता है, जिससे पदार्थ की एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन संभव होता है।
प्रश्न :- दाब में परिवर्तन करने से पदार्थ की अवस्था में किस प्रकार परिवर्तन होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- दाब में परिवर्तन करने से पदार्थ की अवस्था में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव आता है।
जब गैस पर उच्च दाब डाला जाता है और तापमान घटाया जाता है, तो गैस के कण पास-पास आकर द्रव में बदल जाते हैं।
प्रक्रिया / उदाहरण | विवरण |
गैस से द्रव में परिवर्तन | दाब बढ़ाने और तापमान घटाने से गैस के कण पास आकर द्रव में बदलते हैं। दाब बढ़ाना + तापमान घटाना = गैस का द्रव में बदलना |
Dry Ice (शुष्क बर्फ) | यह ठोस CO₂ है, जो बिना द्रव बने, सामान्य दाब पर सीधे गैस में बदल जाती है। dry ice (शुष्क वर्फ) = ठोस कार्बन डाइ ऑक्साइड |
दाब घटाने का प्रभाव | यदि ठोस CO₂ पर दाब कम किया जाए (1 atm तक), तो यह सीधे गैसीय CO₂ में बदल जाती है। |
नोट :-
दाब बढ़ाने से कणों के बीच की दूरी कम हो जाती है और वे आपस में जुड़ जाते हैं, जिससे गैस, द्रव में बदल सकती है।
वहीं, दाब घटाने पर कुछ ठोस सीधे गैस में भी बदल सकते हैं — जैसे dry ice।
प्रश्न :- वाष्पीकरण क्या है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- वाष्पीकरण :- एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी द्रव के ऊपरी सतह के कण, अपने क्वथनांक से कम तापमान पर ही वाष्प/गैस में बदलने लगते हैं। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे और केवल सतह पर होती है।
प्रश्न :- वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं :-
1. सतह का क्षेत्रफल :- जब किसी द्रव का सतही क्षेत्र बढ़ा दिया जाता है, तो अधिक कण सतह से उड़ सकते हैं, जिससे वाष्पीकरण तेज़ हो जाता है।
उदाहरण :-
गीले कपड़े फैलाकर सुखाने से वे जल्दी सूखते हैं क्योंकि सतह बढ़ जाती है।
2. तापमान :- तापमान बढ़ने से द्रव के कणों की गति (गतिज ऊर्जा) तेज हो जाती है, जिससे वे आसानी से वाष्प में बदल जाते हैं।
उदाहरण :-
धूप में रखे पानी की बाल्टी जल्दी सूख जाती है।
3. वायु में नमी (आर्द्रता) :- अगर हवा में पहले से ही बहुत अधिक नमी हो (जैसे बरसात के दिनों में), तो वाष्पीकरण धीमा हो जाता है क्योंकि हवा और अधिक भाप ग्रहण नहीं कर पाती।
उदाहरण :-
मानसून में कपड़े सूखने में ज़्यादा समय लगाते हैं।
4. हवा की गति :- जब हवा तेज़ चलती है, तो वह भाप को दूर ले जाती है, जिससे और अधिक द्रव वाष्प में बदलने लगता है।
उदाहरण :-
पंखे के नीचे कपड़े जल्दी सूखते हैं।
प्रश्न :- वाष्पीकरण से शीतलता कैसे होती है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- जब वाष्पीकरण होता है, तो द्रव के कण वाष्प बनने के लिए ऊर्जा की जरूरत महसूस करते हैं। ये ऊर्जा वे अपने आसपास के वातावरण से लेते हैं। इसके कारण वातावरण की ऊष्मा कम हो जाती है और वहाँ शीतलता महसूस होती है।