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Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 2

Chapter 2: Acids, Bases and Salts
Chapter Introduction: 
This chapter covers the properties, uses, and importance of acids, bases, and salts in daily life. The question–answer format helps students understand concepts easily and revise effectively for examinations.

FAQ
Ques. Is this chapter important for practical examinations?
Ans. Yes, several questions from this chapter are related to laboratory experiments and practical exams.

CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 2 : अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न :- अम्ल किसे कहते है?

उत्तर :- स्वाद में खट्टे लगने वाले उन सभी पदार्थों को विज्ञान की भाषा में अम्ल कहते हैं; जो कि नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।

उदाहरण :-

1. सिट्रिक अम्ल (जो कि लेमन, लाइम, तथा ऑरेंज में पाया जाता है)

2. कच्चा आम, आंवला, तथा कच्ची इम्ली

3. विनेगर (सिरका)

4. चेम्बल (टेमरिंड)

नोट :-

अँग्रेजी भाषा में अम्ल को ऐसिड (acid) कहा जाता है और यह ऐसिड शब्द लैटिन भाषा के शब्द एसिडस (Acidus) से उत्पन्न हुआ है। जिसका अर्थ हिंदी भाषा में खट्टा (Sour) होता है।

प्रश्न :- अम्ल में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं?

उत्तर :- अम्ल के गुणों को मुख्य तौर से निम्नलिखित 2 भागों में विभाजित किया गया हैं :-

1. भौतिक गुण

2. रासायनिक गुण

प्रश्न :- अम्ल के मुख्य भौतिक गुणों के बारे में बताइए?

उत्तर :- अम्ल के मुख्य भौतिक गुण निम्नलिखित है :-

1. अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं।

2. अम्ल नीले लिटपस पेपर को लाल कर देते हैं।

3. अम्ल जलीय विलयन में H+ आयन उत्पन्न करते हैं।

4. अम्ल जलीय विलयन में विद्युत धारा को प्रवाहित करने में सक्षम होते हैं।

प्रश्न :- अम्ल के मुख्य रासायनिक गुणों के बारे में बताइए?

उत्तर :- अम्ल के मुख्य रासायनिक गुण निम्नलिखित है :-

1. अम्ल किसी धातु के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके  हाईड्रोजन गैस को उत्पन्न तथा निष्कासित करता है।

2. अम्ल हाइड्रोजन कार्बोनेट/कार्बोनेट के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके कार्बनडाईऑक्साइ़ड उत्पन्न तथा निष्कासित करता है।

3. अम्ल कुछ धातु ऑक्साइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके लवण और जल भी बनाते हैं।

प्रश्न :- अम्ल के मुख्य प्राकृतिक स्रोतों के बारे में बताइए?

उत्तर :- अम्ल के मुख्य प्राकृतिक स्रोत विभिन्न पदार्थों द्वारा दर्शाए जाते हैं। इस सूची में खाद्य पदार्थ, विभिन्न पौधों के अंग, सब्जियाँ, फल, और अन्य प्राकृतिक स्रोत भी शामिल हैं। कुछ अम्ल के प्राकृतिक स्रोत निम्नलिखित हैं :-

1. नींबू : – सिट्रिक अम्ल

2. आंवला : – सिट्रिक अम्ल 

3. टमाटर : – मैलिक अम्ल और सिट्रिक अम्ल

4. खट्टा दही : – दैहिक अम्ल 

5. दारू : – एस्टिक अम्ल, टार्टरिक अम्ल  एवं अन्य कई अम्ल 

6. आम : – मैलिक अम्ल 

7. विनेगर : – एस्टिक अम्ल 

8. अंगूर : – टार्टरिक अम्ल 

9. शतावरी : – मैलिक अम्ल

प्रश्न :- अम्ल कितने प्रकार/तरह के होते हैं?

उत्तर :- अम्ल मुख्य तौर पर निम्नलिखित चार प्रकार/तरह के होते हैं 

1. प्रबल अम्ल 

2. दुर्बल अम्ल 

3. सान्द्र अम्ल 

4. तनु अम्ल

प्रश्न :- प्रबल अम्ल किसे कहते हैं?

उत्तर :- जो अम्ल जल के विलयन में पूरी तरह विघटित हो जाती है यानि के घुल जाती है, तथा हिडनियम और हाइड्रोक्सिड जैसे दुर्बल अधातुओं का निर्माण करते हैं, प्रबल अम्ल कहलाते हैं। 

उदाहरण :-

1. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hydrochloric Acid)

2. सल्फुरिक अम्ल (Sulfuric Acid)

3. नाइट्रिक अम्ल (Nitric Acid)

4. हाइड्रोब्रोमिक अम्ल (Hydrobromic Acid)

नोट :-

प्रबल अम्लों के अन्दर प्रोटॉन यानि कि हाइड्रोजन (H+) आयन का त्याग करने की क्षमता उच्च होती है, इसका अर्थ यह हुआ कि प्रबल अम्ल स्वयं के संघटक तत्वों के आयनों में विखण्डित हो जाते हैं।

प्रश्न :- दुर्बल अम्ल किसे कहते हैं?

उत्तर :- जो अम्ल किसी जलीय विलयन में पूरी तरह न घुलकर केवल और केवल आंशिक रूप से ही घुलते हैं, दुर्बल अम्ल कहलाते हैं।

उदाहरण :- 

1. एसिटिक अम्ल (Acetic Acid) 

2. कार्बोनिक अम्ल (Carbonic Acid) 

3. फोस्फोरिक अम्ल (Phosphoric Acid) 

नोट :-

दुर्बल अम्ल कभी भी प्रबल अम्लों की तरह अपने भीतर के सभी हाइड्रोजन आयनों (H+) का पूर्णतः त्याग नहीं करते हैं।

प्रश्न :- सान्द्र अम्ल किसे कहते हैं?

उत्तर :- सान्द्र अम्ल उन अम्लों को कहा जाता है, जिसमें जल की अपेक्षा अम्ल अधिक मात्रा में होता है।

उदाहरण :-

1. नींबू : – सिट्रिक अम्ल

2. अमरूद: – सिट्रिक अम्ल 

3. टमाटर : – मैलिक अम्ल और सिट्रिक अम्ल

नोट :-

सान्द्र अम्ल का संबंध मुख्य तौर पर खाने में इस्तेमाल किए जाने वाले अम्लों से है जो विभिन्न खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।

प्रश्न :- तनु अम्ल किसे कहते हैं?

उत्तर :- तनु अम्ल उन अम्लों को कहा जाता है, जिसमें जल की अपेक्षा अम्ल कम मात्रा में होता है।

उदाहरण :- 

1. दही (Yogurt): लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid)

2. आम का अचार: लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) 

3. सरसों तेल: लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid) 

नोट :-

तनु अम्ल का संबंध मुख्य तौर पर खाद्य पदार्थों को जमाने, उन्हे स्वादिष्ट बनाने और उनकी स्थायित्वता को बढ़ाने में बहुत उपयोगी होते हैं।

प्रश्न :- क्षारक किसे कहते हैं?

उत्तर :- क्षारक :- वैसे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे होते हैं, और छूने पर किसी साबुन की तरह लगते हैं, उन्हे क्षारक कहते हैं।

उदाहरण :-

1. करेला

2. बादाम पिस्ता

3. नीम

4. चिकोरी की जड़ और पत्तियां 

प्रश्न :- क्षारक में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं?

उत्तर :- क्षारक के गुणों को मुख्य तौर से 2 भागों में विभाजित किया गया हैं :-

1. भौतिक गुण

2. रासायनिक गुण

प्रश्न :- क्षारक के मुख्य भौतिक गुणों के बारे में बताइए?

उत्तर :- क्षारक के मुख्य भौतिक गुण निम्नलिखित है :-

1. क्षारक स्वाद में कड़वे होते हैं।

2. क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। 

3. क्षारक किसी जलीय विलयन में (OH) आयन देते हैं।

4. क्षारक किसी जलीय विलयन में विद्युत धारा को प्रवाहित नही करता है।

प्रश्न :- क्षारक के मुख्य रासायनिक गुणों के बारे में बताइए?

उत्तर :-  क्षारक के मुख्य रासायनिक गुण निम्नलिखित है :-

1. एक क्षारक किसी धातु के रासायनिक अभिक्रिया करके हाईड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। 

2. एक क्षारक किसी ऑक्साईड के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके लवण का निर्माण करता है।

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक सूचक क्या हैं।

उत्तर :- अम्ल या क्षारक सूचक :- ये वे सूचक होते हैं, जो किसी जलीय विलयन के अन्दर अम्ल या क्षारक के होने की स्थिति को दर्शाते हैं। इन सूचकों का रंग अथवा गंध बदलकर अम्ल अथवा क्षारक की पहचान करवाता है।

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक के सूचक के सभी प्रकार लिखें।

उत्तर :- सामान्य तौर पर देखा जाए तो ये सूचक कई प्रकार के होते हैं, जो कि निम्नलिखित हैं :-

1. प्राकृतिक सूचक 

2. संश्लेषित सूचक 

3. गंधीय सूचक 

4. सार्वत्रिक सूचक

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक के प्राकृतिक सूचकों के सभी प्रकार लिखें।

उत्तर :- अम्ल या क्षारक के प्राकृतिक सूचक वे सूचक हैं जिन्हे हम प्राकृतिक स्राेतों से प्राप्त कर सकते हैं :-

उदाहरण :-

1. लिटमस पत्र

2. हल्दी

3. हायड्रेजिया के फूलों का रस 

4. लाल पत्तागोभी का रस  

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक की पहचान प्राकृतिक सूचक लिटमस पत्र द्वारा कैसे की जाती है?

उत्तर :- अम्ल या क्षारक की पहचान करने के लिए प्राकृतिक सूचकों में से सबसे अधिक लिटमस पत्रों को ही उपयोग में लाया जाता है जो कि शैवाल(लाईकेन) से प्राप्त होता है।

1. लिटमस पत्र सामान्य तौर पर कागज की पट्टियों (इन्हे ही लिटमस पत्र कहते हैं।) के रूप में तथा विलयन के रूप में पाए जाते हैं।

2. लिटमस पत्र नीला तथा लाल दो रंगों के होते हैं, यहाँ एक अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल रंग में बदल देता है, वहीं एक क्षार लाल लिटमस पत्र को नीले रंग में बदल देता है।

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक की पहचान प्राकृतिक सूचक हल्दी द्वारा कैसे की जाती है?

उत्तर :- जैसा कि आप जानते ही हैं, हल्दी पीले रंग का अम्ल या क्षारक की पहचान करने वाला एक प्राकृतिक सूचक है :-

1. अम्ल जब हल्दी के संपर्क में आता है, तो इसमें कोई भी परिवर्तन नहीं दिखता है

2. वहीं एक क्षारक के संपर्क में आने से हल्दी का रंग पीले से भूरा अथवा लाल हो जाता है।

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक के संश्लेषित सूचकों के सभी प्रकार लिखें।

उत्तर :- अम्ल या क्षारक के संश्लेषित सूचकों का निर्माण रासायनिक पदार्थों द्वारा किया जाता है, तथा इनके द्वारा अम्ल या क्षारक की जाँच की जा सकती है।

उदाहरण :-

1. फिनोफ्थेलीन 

2. मेथिल ऑरेंज

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक के गंधीय सूचकों के सभी प्रकार लिखें।

उत्तर :- अम्ल या क्षारक के गंधीय सूचक वे पदार्थ होते हैं, जिन पदार्थों की गंध अम्ल या क्षारक के माध्यम के रूप में परिवर्तित हो जाती है। उनको गंधीय सूचक कहते हैं।

उदाहरण :-

1. नींबू का रस – गंध माध्यम – अम्ल

2. सोडा – गंध माध्यम – क्षार

3. लौंग – गंध माध्यम – अम्ल

4. प्याज – गंध माध्यम – अम्ल

प्रश्न :- अम्ल या क्षारक के सार्वत्रिक सूचकों के सभी प्रकार लिखें।

उत्तर :- अम्ल या क्षारक के सार्वत्रिक सूचकों का निर्माण विभिन्न प्रकार के रसायनों के मिश्रण से होता है, जो अलग अलग pH मान के पदार्थों के विषय में उनके रंगों के परिवर्तन से ही बता देते हैं, कि वह अम्ल हैं, या क्षारक। 

उदाहरण :- 

1. नींबू का रस – अम्ल 

2. सोडा क्षारक

3. जल अम्ल तथा क्षारक दोनों 

4. विनेगर अम्ल

प्रश्न :- लवण किसे कहते हैं?

उत्तर :- एक धातु, अम्लों के भीतर से हाइड्रोजन के परमाणुओं को हाइड्रोजन के गैस के रूप में विस्थापित करके एक यौगिक का निर्माण करती है, इस यौगिक को ही लवण कहते हैं। 

उदाहरण :-

Na+ (नैट्रियम) + Cl (क्लोराइड) = NaCl (लवण)

प्रश्न :- लवण के गुणों के बारे में बताइए।

उत्तर :-  एक लवण के भीतर निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं :-

1. सामान्यतः लवण ठोस अवस्था में ही पाए जाते हैं।

2. लवण सामान्य तौर पर उदासीन होते हैं। 

3. लवण जलीय विलयन में विद्युत के अच्छे सुचालक होते हैं

प्रश्न :- पॉप टेस्ट किसे कहते हैं?

उत्तर :- हाइड्रोजन गैस की मौजूदगी को दर्शाने के लिए पॉप टेस्ट का प्रयोग किया जाता है। इस टेस्ट में एक हाइड्रोजन गैस युक्त परखनली को एक जली हुई मोमबत्ती के करीब लाने पर, पॉप की ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न :- एक अम्ल की किसी धातु के साथ अभिक्रिया को समझाइए।

उत्तर :- यहाँ सल्फ्यूरिक अम्ल की धातु आयरन  के साथ अभिक्रिया को दिखाया गया है :-

1. Fe (धातु) + H2SO4 (अम्ल) → FeSO4 (लवण) + H2 (हाइड्रोजन) 

2. आयरन धातु + सल्फ्यूरिक अम्ल → फेरसल्फेट + हाइड्रोजन गैस

प्रश्न :- एक क्षारक की किसी धातु के साथ अभिक्रिया को समझाइए।

उत्तर :- यहाँ पोटेशियम हाइड्रोक्साइड क्षार की धातु आयरन  के साथ अभिक्रिया को दिखाया गया है :-

1. Fe (धातु) + 2KOH (क्षार) → K2FeO2 (लवण) + H2 (हाइड्रोजन) 

2. आयरन धातु + पोटेशियम हाइड्रोक्साइड क्षार → पोटेशियम फेरोक्साइड + हाइड्रोजन गैस

प्रश्न :- उदासीन को परिभाषित कीजिए।

उत्तर :- उदसीन उन पदार्थों को कहा जाता है, जो पदार्थ किसी भी लिटमस पत्र के रंग में कोई बदलाव नही करते हैं। न ही  नीले रंग के लिटमस पत्र में और न ही लाल रंग के लिटमस पत्र में।

उदाहरण :-

नमक(NaCl), सोडियम कार्बोनेट(Na2CO3), सोडियम बाइकार्बोनेट(NaHCO3), केल्शियम क्लोराइड(CaCl2)

नोट :-

ये पदार्थ न तो अम्ल होते हैं, तथा न ही क्षारीय।

प्रश्न :- उदासीनीकरण अभिक्रिया को समझाइए।

उत्तर :- जब किसी अभिक्रिया में अम्ल का किसी क्षारक के साथ अभिक्रया होता है, तो ये दोनों ही एक दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं, और जिसके परिणाम स्वरूप लवण और जल की प्राप्ति होती है, इसे ही उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। 

उदाहरण :-

1. KOH(aq) + HNO3 → KNO3(aq) + H2O(l)

2. NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)

आइए समझते हैं, उदासीनीकरण अभिक्रिया होती कैसे है :-

1. जब एक प्रबल अम्ल एक दुर्बल क्षारक के साथ अभिक्रिया करता है, तब हमें अम्लीय लवण तथा जल प्राप्त होता है। (यहाँ विलयन का pH मान 7 से कम ही होता है।)

2. जब एक प्रबल क्षारक एक दुर्बल अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तब हमें क्षारकीय लवण तथा जल प्राप्त होता है। (यहाँ विलयन का pH मान 7 से अधिक ही होता है।)

3. जब एक प्रबल अम्ल एक प्रबल क्षारक के साथ अभिक्रिया करता है, तब हमें उदासीन लवण तथा जल प्राप्त होता है। (यहाँ विलयन का pH मान 7 होता है।)

4. जब एक दुर्बल अम्ल एक दुर्बल क्षारक के साथ अभिक्रिया करता है, तब हमें उदासीन लवण तथा जल प्राप्त होता है। (यहाँ विलयन का pH मान 7 होता है।)

प्रश्न :- एक अम्ल के साथ किसी धात्विक ऑक्साइड की अभिक्रिया को समझाइए।

उत्तर :- जब एक अम्ल के साथ किसी धात्विक ऑक्साइड की अभिक्रिया होती है, तब इस प्रक्रिया से नए रासायनिक यौगिकों का उत्पादन होता है। आइए समझते हैं, कैसे :-

1. H2SO4 + CaO → CaSO4 + H2O

2. क्योंकि धात्विक ऑक्साइड अम्ल के साथ मिलकर लवण तथा जल बनाते हैं, इससे पता चलता है कि ये क्षारक होते हैं। जैसे :- (i) FeO, (ii) AgO

प्रश्न :- अम्लों तथा क्षारको में क्या समानताएँ होती हैं, समझाइए।

उत्तर :- अम्लों तथा क्षारकों में निम्नलिखित समानताएँ पाई जाती है :-

1. सभी अम्लों में हाइड्रोजन आयन H+ उत्पन्न करने की क्षमता होती है।

2. सभी क्षारकों में हाइड्रोक्साल आयन OH उत्पन्न करने की क्षमता होती है।

प्रश्न :- किसी जलीय विलयन में अम्लों तथा क्षारको का क्या होता है, समझाइए।

अथवा

तनुकरण किसे कहते हैं, विस्तार से समझाइए।

उत्तर :- किसी जलीय विलयन में अम्लों तथा क्षारको के मिलाने पर (HO+ और OH) आयन की सांद्रता में प्रति इकाई आयतन में कमी कर देता है, इस प्रक्रिया को तनुकरण कहते हैं। आइए विस्तार से समझते है :-

1. अम्लों का प्रविलयन: अम्लों में (H+) हाइड्रोजन आयन्स पाये जाते हैं, जो जल में विलीन होने पर हाइड्रोनियम आयन्स (HO+) उत्पन्न करते हैं। यह अभिक्रिया “हाइड्रोनियम प्रविलयन” कहलाती है। 

2. क्षारको का प्रविलयन: क्षारकों में (OH) हाइड्रोक्साइल आयन्स पाए जाते हैं, जिनका जल में विलयन होने पर उनका प्रतिष्ठान आयनिक रूप में ही रहता है। यह प्रक्रिया “हाइड्रोक्साइल प्रविलयन” कहलाती है।

प्रश्न :- अम्लों तथा क्षारको की प्रबलता को हम कैसे माप सकते हैं, समझाइए।

उत्तर :- अम्लों तथा क्षारकों की प्रबलता को हम निम्नलिखित तरीकों से माप सकते हैं :-

1. अमलों तथा क्षारकों की प्रबलता को हम  सार्वभौमिक सूचक से भी जान सकते हैं। 

2. अम्लों तथा क्षारकों की प्रबलता को हम उनके द्वारा उत्पन्न आयन्स (H+ तथा OH–) से माप सकते हैं।

प्रश्न :- सार्वभौम सूचक क्या है।

उत्तर :- आइए जानते हैं, सार्वभौम सूचक क्या है,

1. सार्वभौम सूचक कई सूचकों का मिश्रण है।

2. सार्वभौम सूचक किसी जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन्स (H+ तथा OH) की विभिन्न सांद्रताओं को अलग-अलग रंगों में प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न :- pH स्केल क्या है।

उत्तर :- pH स्केल एक,

1. मापन यंत्र है, जिसका उपयोग किसी तत्व या द्रव्य में अम्लता अथवा क्षारता को मापने के लिए करते हैं।

2. मापन यंत्र है, जिसका उपयोग तत्वों में  (H+) हाइड्रोनियम आयन और (OH) हाइड्रोक्साइल आयन की मात्रा का पता लगाने में किया जाता है।

3. मापन यंत्र हैं, जहाँ pH में p का अर्थ है शक्ति जो कि जर्मनी के Potenz (पुसांस) शब्द से निर्मित है। जबकि H का अर्थ हाइड्रोजन होता है।

नोट :- 

1. अम्लीय विलयन = pH < 7

2. उदासीन विलयन = pH = 7

3. क्षारीय विलयन = pH > 7

प्रश्न :- पशु तथा पौधों के जीवन में pH का क्या महत्व है।

उत्तर :- पशु तथा पौधे दोनो ही pH मान की तरफ संवेदनशील होते हैं।

प्रश्न :- मानव शरीर कितने pH के बीच कार्य करती है। 

उत्तर :- मानव शरीर 7 से 7.8 pH मान के बीच कार्य करता है।

प्रश्न :- अच्छी उपज देने के लिए मिट्टी का pH कितना होना चाहिए। 

उत्तर :- अच्छी उपज देने के लिए अनेको पौधों के लिए मिट्टी का उचित pH मान 6 से 7.5 के बीच ही होता है। लेकिन, कुछ पौधों को विशेष pH की आवश्यकता होती हैं, जिसकी कमी को अम्लीय या क्षारीय पदार्थ मिला कर पूरा कर लिया जाता है।

प्रश्न :- मानव शरीर के पाचन तंत्र का pH मान कितना होता है? 

उत्तर :- आमतौर पर एक मानव शरीर के पाचन के तंत्र का pH का मान 1.5 से 3.5 के बीच में होता है। यह मानव के पाचन तंत्र के अंदर की विभिन्न भागों में अलग-अलग भी हो सकता है। भोजन को पचाने के लिए हमारा पेट हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है।

प्रश्न :- भोजन के अपच की स्थिति में पेट में दर्द क्यो होता है? इससे बचाव के क्या उपाय है?

उत्तर :- भोजन के अपच की स्थिति में हमारा पेट अधिक मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है, जिसकी वजह से हमारे पेट में जलन तथा दर्द होता है। इससे बचाव के लिए हम (Antacid) ऐन्टेसिड जैसे क्षारको का उपयोग करते हैं जो अम्ल की अधिकता को उदासीन कर देता है। 

उदाहरण :-

मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैगनीशिया) – एक दुर्बल क्षारक

प्रश्न :- दांतों का क्षय क्यों होता है? कारण और बचाव के उपाय सहित बताइए।

उत्तर :- दांतों का क्षय मुँह के pH के मान का 5.5 से कम हो जाने पर प्रारंभ हो जाता है।

इससे बचाव के उपाय :- किसी क्षारकीय टूथ-पेस्ट (दंत मंजन) का उपयोग करके अम्ल की अधिकता को उदासीन कर सकते हैं, और दाँतों के क्षय से बचाव किया जा सकता है।

प्रश्न :- हमारे दाँत किस पदार्थ/चीज से बने होते हैं।

उत्तर :- हमारे दाँतों का दन्तवल्क अर्थात् इनेमल कैल्सियम फॉस्फेट से बना हुआ है जो कि शरीर का सबसे कठोरतम पदार्थ है।

प्रश्न :- मधुमक्खी के डंक में कौन सा अम्ल पाया जाता है।

उत्तर :- मधुमक्खी के डंक में फॉर्मिक नामक अम्ल पाया जाता है, जिस वजह से डंक लगने वाली जगह पर जलन व दर्द होने लगता है, डंक लगने वाली जगह पर बेकिंग सोडा के इस्तेमाल से काफी आराम मिलता है।

प्रश्न :- नेटल के डंक में कौन सा अम्ल पाया जाता है।

उत्तर :- नेटल के पौधों में शीघ्रिका अम्ल पाया जाता है  जिसे मुख्य रूप से मेथेनोईक अम्ल (Methanoic Acid) भी कहा जाता है। जिस वजह से डंक लगने वाली जगह पर जलन व दर्द होने लगता है।

प्रश्न :- अम्लीय वर्षा किसे कहा जाता है।

उत्तर :- 5.6 से कम pH मान वाली बरसात को अम्लीय वर्षा कहा जाता है।

प्रश्न :- लवण का pH मान क्या होता है।

उत्तर :- लवण का pH मान निम्नलिखित होता है,

1. प्रबल क्षारक + प्रबल अम्ल = उदासीन = pH मान 7

2. प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक = अम्लीय = pH मान 7 से कम

3. प्रबल क्षारक + दुर्बल अम्ल = क्षारकीय = pH मान 7 से अधिक

प्रश्न :- साधारण नमक किस प्रकार से बनाया जाता है?

उत्तर :- साधारण नमक को समुन्द्री जल से बनाया जाता है, इसका रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड NaCl है।

प्रश्न :- रॉक सॉल्ट क्या है?

उत्तर :- रॉक सॉल्ट को भी कोयले की ही भाँति निष्कर्षण द्वारा प्राप्त किया जाता है, ये प्राथमिक रूप में ग्रे कलर का एक क्रिस्टल होता है।

प्रश्न :- साधारण नमक को रसायनों का कच्चा पदार्थ क्यों कहा जाता है?

उत्तर :- साधारण नमक जिसे हम सोडियम क्लोराइड के नाम से भी जानते हैं, ये बेकिंग सोडा, वाशिंग  सोडा, सोडियम हाइड्रॉक्साइड और विरंजक चूर्ण आदि कई रसायनों के लिए कच्चे पदार्थ के रूप में उपयोग होता है।

प्रश्न :- साधारण नमक अर्थात् सोडियम क्लोराइड से सोडियम हाइड्रॉक्साइड कैसे प्राप्त किया जाता है?

अथवा

क्लोर क्षार प्रक्रिया किसे कहते हैं?

उत्तर :- साधारण नमक अर्थात् सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन में से विद्युत की धारा प्रवाहित करवाने पर यह विखंडित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड का उत्पादन करता है। अब क्योंकि इस प्रक्रिया में दो उत्पाद क्लोरीन जो की एक क्लोर तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक क्षार की उत्पत्ति होती है, इसलिए इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया भी कहा जाता है। 

उदाहरण :-

2NaCl + 2H2O → 2NaOH + Cl2 + H2 

नोट :-

यहाँ, उत्पन्न हुए तीनो पदार्थ बहुत उपयोगी होते हैं, क्लोरीन ऐनोड पर तथा हाइड्रोजन गैस कैथोड पर मुक्त होती है। इस प्रक्रिया में कैथोड पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन का भी निर्माण होता है।

प्रश्न :- विरंजक चूर्ण का निर्माण कैसे किया जाता है?

उत्तर :- (Cl) क्लोरीन के साथ [(CaOH)2] शुष्क बुझे हुए चूने की क्रिया करवाने से विरंजक चूर्ण का निर्माण होता है। इसका रासायनिक सूत्र है CaOCl2 जिसे कैल्शियम ऑक्सी क्लोराइड भी कहते हैं।

उदाहरण :-

Cl2 + Ca(OH)2 → CaOCl2 + H2O

प्रश्न :- विरंजक चूर्ण का उपयोग कहाँ किया जाता है?

उत्तर :- विरंजक चूर्ण का उपयोग निम्नलिखित स्थानों पर किया जाता है :-

1. वस्त्रों के उद्योग के क्षेत्र में लिनेन व सूती वस्त्रों के शुद्धीकरण के लिए विरंजक चूर्ण का उपयोग किया जाता है।

2. कागज बनाने वाली फैक्ट्री में लकड़ी के मज्जा के शद्धीकरण के लिए विरंजक चूर्ण का उपयोग किया जाता है।

3. रासायनिक उद्योगों में विरंजक चूर्ण का उपयोग एक उपचायक के रूप में किया जाता है।

4. विरंजक चूर्ण का उपयोग पीने योग्य जल में जल को जीवाणुओं से मुक्त कराने के लिए जाता है।

प्रश्न :- बेकिंग सोडा  का निर्माण कैसे किया जाता है?

उत्तर :-(NaCl) सोडियम क्लोराइड के साथ (H2O)] पानी की क्रिया करवाने के पश्चात इस मिश्रण को सुखाने से बेकिंग सोडा का निर्माण होता है। इसका रासायनिक सूत्र है NaHCO3  जिसे सोडियम बाइकार्बोनेट तथा सोडियम हाईड्रोजन  कार्बोनेट  भी कहते हैं।

उदाहरण :-

Na2CO3 + H2O → 2NaOH + CO2

प्रश्न :- बेकिंग सोडा  का उपयोग कैसे किया जाता है?

उत्तर :- बेकिंग सोडा का उपयोग निम्नलिखित कार्यों को पूर्ण करने के लिये किया जाता है :-

1. रसोईघरों में पकौड़े को खस्ता बनाने के लिए तथा भोजन को शीघ्रता से पकाने के लिए।

2. बेकिंग पाउडर को बनाने में (बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल = बेकिंग पाउडर)।

3. पावरोटी या केक में खमीर उठाने के लिए तथा उसे स्पंजीमुलायम बनाने के लिए।

4. एन्टैसिड का संघटन करने के लिए।

5. इसका उपयोग अग्निशामक के रूप में भी किया जाता है।

प्रश्न :- धोने के सोडा का निर्माण कैसे किया जाता है?

उत्तर :- सोडियम कार्बोनेट का क्रिस्टलीकरण करने पर हमें धोने का सोडा की प्राप्ति होती है यह एक छार है।

उदाहरण :-

Na2CO3 + 10H2O → Na2CO3 + 10H2O

प्रश्न :- धोने के सोडा का उपयोग कैसे किया जाता है?

उत्तर :- धोने के सोडा का उपयोग निम्नलिखित कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

1. साबुन, कागज़ तथा कांच के उद्योगों में 

2. बोरेक्स के उत्पादन में 

3. घरों के अन्दर साफ सफाई करने के लिए 

4. जल की स्थाई कठोरता को हटाने के लिए

प्रश्न :- प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग कैसे किया जाता है?

उत्तर :- प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग निम्नलिखित कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

1. टूटी हुई हड्डियों को  सही जगह पर स्थिर रखने के लिए 

2. सजावट का सामान तथा खिलोने आदि बनाने के लिए

3. किसी उबड़ खाबड़ सतह को समतल अथवा चिकना बनाने के लिए

प्रश्न :- प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण कैसे किया जाता है।

उत्तर :- प्लास्टर ऑफ पेरिस को प्राप्त करने के लिए हमें जिप्सम को 373k पर गर्म करना होता है जिसके कारण यह जल के अणुओं को त्याग देता है और कैल्सियम सल्फेट हेमिहाइड्रेट अर्थात् प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का निर्माण करता है।

नोट :- 

POP एक सफेद चूर्ण के रूप में होता है जिसमें जल मिलाने से यह पुनः ठोस जिप्सम बन जाता है। 

इसका रासायनिक सूत्र CaSo4½H2O है।

प्रश्न :- क्रिस्टलन का जल किसे कहते हैं?

उत्तर :- किसी भी लवण के एक इकाई सूत्र में जल के सभी अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं।

उदाहरण :-

1. SnCl2·2H2O – टिन क्लोराइड – क्रिस्टलन के जल के अणुओं की संख्या 2 

2. CuSO4·5H2O – कॉपर सल्फेट – क्रिस्टलन के जल के अणुओं की संख्या 5

3. CoCl2·6H2O – कोबाल्ट क्लोराइड – क्रिस्टलन के जल के अणुओं की संख्या 6

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