Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 4
Chapter 4: Structure of the Atom
Chapter Introduction:
This chapter explains the structure of an atom, subatomic particles, and atomic models. The content is designed to help students understand atomic theory step by step.
FAQ
Ques. Do conceptual questions come from this chapter?
Ans. Yes, many concept-based questions are asked from atomic structure.
CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 4 : परमाणु की संरचना
प्रश्न :- परमाणु क्या होता है? इसे समझाइए।
उत्तर :- परमाणु :- किसी भी पदार्थ का सबसे छोटा कण होता है, जो उस पदार्थ के सभी रासायनिक गुणों को दर्शा सकता है। परमाणु, तीन उप-परमाणु कणों से मिलकर बना होता है:- प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन।
नोट:-
प्रारंभ में जॉन डाल्टन ने यह माना था कि “परमाणु अविभाज्य है (यानि उसे और छोटे भागों में नहीं बाँटा जा सकता)।” लेकिन बाद में उप-परमाणु कणों (जैसे प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन) की खोज ने यह सिद्ध कर दिया कि परमाणु विभाज्य होता है।
प्रश्न :- इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की?
उत्तर :- इलेक्ट्रॉन की खोज प्रसिद्ध वैज्ञानिक जे. जे. थॉमसन ने की थी। उन्होंने कैथोड किरण प्रयोग (Cathode Ray Experiment) के माध्यम से परमाणु में इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति का पता लगाया।
इलेक्ट्रॉन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
बिंदु | विवरण |
खोजकर्ता | जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson) |
खोज का माध्यम | कैथोड किरणें (Cathode Rays) |
इलेक्ट्रॉन पर आवेश | – 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलम्ब (C) |
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान | 9.1 × 10⁻³¹ किलोग्राम (kg) |
आवेश का प्रकार | ऋणात्मक (Negative) |
प्रतीक | e⁻ |
नोट:-
2. यह परमाणु के बहुत बाहर (nucleus के चारों ओर) गति करता है।
प्रश्न :- प्रोटॉन की खोज किसने की?
उत्तर :- प्रोटॉन की खोज ई. गोल्डस्टीन (E. Goldstein) ने की थी।
उन्होंने एनोड किरणें या केनाल किरणें (Canal Rays) के प्रयोग से यह खोज की थी।
प्रोटॉन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
बिंदु | विवरण |
खोजकर्ता | ई. गोल्डस्टीन (E. Goldstein) |
खोज का माध्यम | एनोड किरणें / केनाल किरणें (Canal Rays) |
प्रोटॉन पर आवेश | +1.6 × 10⁻¹⁹ कूलम्ब (C) |
प्रोटॉन का द्रव्यमान | 1.673 × 10⁻²⁷ किलोग्राम (kg) |
प्रोटॉन का द्रव्यमान | इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से 1840 गुना अधिक |
आवेश का प्रकार | धनात्मक (Positive) |
प्रतीक | p⁺ |
नोट:-
2. यह धनात्मक आवेशित उप-परमाणु कण है।
प्रश्न :- न्यूट्रॉन की खोज किसने की?
उत्तर :- न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने की थी।
उन्होंने हल्के तत्वों (जैसे- लीथियम, बोरोन आदि) पर कणों की बमबारी करवाई, जिससे एक नए कण का पता चला
जिसका द्रव्यमान प्रोटॉन के बराबर था, लेकिन उस पर कोई आवेश नहीं था।
इन्हीं कणों को न्यूट्रॉन कहा गया।
न्यूट्रॉन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
बिंदु | विवरण |
खोजकर्ता | जेम्स चैडविक (James Chadwick) |
खोज का माध्यम | हल्के तत्वों पर कणों की बमबारी |
न्यूट्रॉन पर आवेश | कोई नहीं (शून्य / Neutral) |
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान | लगभग 1.675 × 10⁻²⁷ किलोग्राम (kg) |
द्रव्यमान की तुलना | प्रोटॉन के लगभग बराबर |
स्थान | परमाणु के नाभिक (nucleus) में |
हाइड्रोजन में अनुपस्थिति | हाइड्रोजन के प्रोटियम समस्थानिक में नहीं पाया जाता |
प्रश्न :- परमाणु मॉडल क्या है? किन वैज्ञानिकों ने परमाणु के मॉडल प्रस्तुत किए हैं?
उत्तर :- जब वैज्ञानिकों ने उप-परमाण्विक कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज की, तब यह जानने की कोशिश की गई कि ये कण परमाणु में किस तरह से स्थित हैं।
इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने परमाणु के निम्नलिखित विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए।
क्रमांक | परमाणु मॉडल | प्रस्तुत करने वाले वैज्ञानिक |
(a) | टॉमसन का परमाणु मॉडल | जे. जे. टॉमसन (J. J. Thomson) |
(b) | रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल | रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) |
(c) | बोर का परमाणु मॉडल | नील्स बोर (Niels Bohr) |
नोट:-
आज के समय में क्वांटम यांत्रिक परमाणु मॉडल को वैज्ञानिक रूप से सबसे सटीक माना जाता है तथा इस माॅडल को स्वीकृति भी दी गई है।
हालाँकि, इसे उच्च कक्षाओं (जैसे कक्षा 11–12) में विस्तार से पढ़ाया जाता है।
प्रश्न :- टॉमसन का परमाणु मॉडल क्या था? इसे क्यों ‘कटा तरबूज मॉडल’ कहा जाता है?
उत्तर :- टॉमसन का परमाणु मॉडल वर्ष 1897 में जे. जे. टॉमसन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
इसे ‘कटा तरबूज मॉडल’ भी कहा जाता है।
मॉडल की विशेषता :-
टॉमसन के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है, जैसे तरबूज का लाल भाग।
इसमें इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण होते हैं, जो उस गोले में तरबूज के बीजों की तरह फैले होते हैं। इसलिए इसे ‘कटा तरबूज मॉडल’ कहा जाता है।
इस मॉडल में धनावेश और ऋणावेश की कुल मात्रा बराबर मानी गई है, जिससे परमाणु विद्युत अंततः न्यूट्रल (आवेशरहित) होता है।
कमियाँ :-
1. यह मॉडल यह नहीं समझा सका कि इलेक्ट्रॉन स्थिर क्यों रहते हैं और न ही उनकी स्थिति और गति के बारे में बता पाया।
2. इसलिए यह मॉडल अधिक वैज्ञानिकों को स्वीकार्य नहीं हुआ और बाद में नकार दिया गया।
नोट :-
प्रश्न :- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या था? यह किस प्रयोग पर आधारित था?
उत्तर :- रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल प्रसिद्ध सोने की पन्नी (Gold Foil) प्रयोग पर आधारित था। यह प्रयोग वर्ष 1909 में एर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा किया गया था।
रदरफोर्ड प्रयोग का विवरण :-
1. रदरफोर्ड ने तेज गति से चलने वाले अल्फा कण (He²⁺) को बहुत पतली सोने की पन्नी के साथ टक्कर करवाई।
2. अधिकतर अल्फा कण सीधे निकल गए।
3. कुछ थोड़े-से कण निम्न कोणों से मुड़ गए।
4. बहुत ही कम कण जैसे कि प्रत्येक 12000 कणों में से केवल एक वापस लौट आए।
इससे रदरफोर्ड ने क्या निष्कर्ष निकाला?
1. परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त (खाली) होता है, क्योंकि ज़्यादातर अल्फा कण बिना किसी रुकावट के सीधे निकल गए।
2. परमाणु के केंद्र में एक छोटा, घना और धनात्मक आवेश वाला भाग होता है, जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है। यह निष्कर्ष इसलिए निकला क्योंकि लगभग हर 12000 में से एक अल्फा कण पीछे की ओर लौट गया।
3. कुछ अल्फा कणों का मुड़ जाना यह दर्शाता है कि नाभिक धनावेशित है, और उसमें द्रव्यमान केंद्रित होता है।
4. नाभिक का आकार परमाणु के आकार से बहुत छोटा होता है, लगभग 10,000 गुना छोटा।
5. परमाणु का सम्पूर्ण द्रव्यमान नाभिक में ही स्थित होता है।
रदरफोर्ड के प्रयोग की विशेषताएँ :-
1. परमाणु का केंद्र एक धनावेशित भाग होता है, जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है।
2. परमाणु का पूरा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है।
3. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों तरफ वलयाकार पथ (circular path) में घूमते रहते हैं।
4. नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में बहुत ही छोटा होता है।
रदरफोर्ड के प्रयोग की मुख्य कमी:-
रदरफोर्ड ने कहा कि – “इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वलयाकार मार्ग (circular path) में घूमते हैं।” लेकिन
1. चूँकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित (negative charge) कण हैं और गति कर रहे हैं, इसलिए भौतिकी के नियमों के अनुसार, वे अपनी ऊर्जा खोते रहते हैं।
2. जैसे-जैसे ऊर्जा घटती है, इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर गिरता है, और अंत में नाभिक से टकराकर परमाणु को अस्थिर बना देता है।
“लेकिन ऐसा वास्तविक जीवन में नहीं होता है — परमाणु स्थिर रहते हैं।”
नोट :-
इसी कारण से, उनका मॉडल अधूरा माना गया और बाद में बोर मॉडल द्वारा इसे सुधारा गया।
प्रश्न :- बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य बिंदु क्या थे?
उत्तर :- बोर ने रदरफोर्ड के मॉडल की कमी को दूर करते हुए 1912 में परमाणु का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया। इस मॉडल में परमाणु की संरचना से जुड़े निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य बताए गए :-
बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य विशेषताएँ :-
1. नियत ऊर्जा कक्षाएँ :- इलेक्ट्रॉन परमाणु के केंद्र यानी नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित ऊर्जा कक्षाओं (energy levels) में ही चक्कर लगाते हैं। इन्हें निर्धारित कक्षाएँ या श्रेणियाँ (shells) कहा जाता है।
2. ऊर्जा का विकिरण नहीं होता :- जब तक इलेक्ट्रॉन किसी निश्चित कक्षा में घूमते हैं, तब तक वे अपनी ऊर्जा नहीं खोते। इस प्रकार परमाणु स्थिर बना रहता है।
3. ऊर्जा परिवर्तन :- जब कोई इलेक्ट्रॉन एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाता है, तो वह
(i) ऊर्जा प्राप्त करता है (ऊँची कक्षा में जाने पर) या
(ii) ऊर्जा उत्सर्जित करता है (नीची कक्षा में आने पर)।
नोट:-
बोर का मॉडल यह समझाने में सफल रहा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरते और परमाणु कैसे स्थिर बना रहता है। यह मॉडल आगे चलकर आधुनिक परमाणु सिद्धांत का आधार बना।
प्रश्न :- परमाणु संख्या किसे कहते हैं?
उत्तर :- परमाणु संख्या :- किसी भी परमाणु में प्रोटॉन की कुल संख्या को उसकी परमाणु संख्या कहा जाता है।
परमाणु संख्या से जुड़ी मुख्य विशेषताएँ :-
1. परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या
उदाहरण :-
हाइड्रोजन में 1 प्रोटॉन होता है, इसलिए उसकी परमाणु संख्या 1 होती है।
2. प्रत्येक तत्व की एक विशिष्ट परमाणु संख्या होती है
उदाहरण :-
(i) हाइड्रोजन (H) की परमाणु संख्या = 1
(ii) हीलियम (He) की परमाणु संख्या = 2
(iii) कार्बन (C) की परमाणु संख्या = 6
3. परमाणु संख्या बदलने से तत्व भी बदल जाता है, इसलिए यह तत्व की पहचान का आधार/परिचायक होती है।
4. प्रतीक :- परमाणु संख्या को ‘Z’ अक्षर द्वारा दर्शाया जाता है।
5. अनावेशित (neutral) परमाणु में :- प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन
नोट :-
परमाणु संख्या यह बताती है कि कोई तत्व कौन सा है, और यही उसे आवर्त सारणी में उसकी स्थिति दिलाती है।
प्रश्न :- द्रव्यमान संख्या किसे कहते हैं?
उत्तर :- द्रव्यमान संख्या :- किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन की कुल संख्या होती है।
द्रव्यमान संख्या को ‘A’ से दर्शाया जाता है।
सूत्र:-
A = p + n
जहाँ,
A = द्रव्यमान संख्या
p = प्रोटॉनों की संख्या
n = न्यूट्रॉनों की संख्या
प्रश्न :- संयोजकता क्या होती है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- संयोजकता :- बोरबरी नियम के अनुसार संयोजकता किसी तत्व की वह क्षमता होती है, जिसके द्वारा वह दूसरे तत्वों के साथ मिलकर रासायनिक बंध बनाता है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि कोई तत्व अपने बाहरी (अंतिम) कोश में 8 इलेक्ट्रॉन पूरे करने के लिए कितने इलेक्ट्रॉन लेता, देता या साझा करता है।
जब कोई तत्व इलेक्ट्रॉन लेता या देता है, तो जितने इलेक्ट्रॉन उसमें भाग लेते हैं, उसी संख्या को उस तत्व की संयोजकता (Valency) कहा जाता है।
उदाहरण :-
1. हाइड्रोजन (H) का एक इलेक्ट्रॉन है, इसे 2 इलेक्ट्रॉन पूरे करने हैं, इसलिए यह एक इलेक्ट्रॉन साझा करता है → इसकी संयोजकता 1 है।
2. ऑक्सीजन (O) को 8 इलेक्ट्रॉन पूरे करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए → इसकी संयोजकता 2 है।
नोट:-
प्रश्न :- समस्थानिक किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- समस्थानिक :- वे परमाणु होते हैं जो एक ही तत्व के बने होते हैं, तथा जिनकी परमाणु संख्या समान होती है लेकिन उनकी द्रव्यमान संख्या अलग-अलग होती है।
उदाहरण :-
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं:
1. प्रोटियम (1H1) – इसमें 1 प्रोटॉन और 0 न्यूट्रॉन होते हैं।
2. ड्यूटेरियम (1H2) – इसमें 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होते हैं।
3. ट्रिटियम (1H3) – इसमें 1 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं।
तीनों में परमाणु संख्या 1 है, लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग है, इसलिए ये समस्थानिक कहलाते हैं।
नोट :-
1. समस्थानिकों में प्रोटॉन की संख्या समान होती है।
2. न्यूट्रॉन की संख्या अलग-अलग होने के कारण इनकी द्रव्यमान संख्या अलग होती है।
3. रासायनिक गुण समान होते हैं, परंतु भौतिक गुण भिन्न हो सकते हैं।
प्रश्न :- समस्थानिकों का क्या उपयोग होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- समस्थानिकों का विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपयोग होता है, जैसे चिकित्सा, ऊर्जा उत्पादन और पुरातात्विक खोजों में। ये उपयोग उनके विशेष भौतिक गुणों पर आधारित होते हैं जो कि निम्नलिखित है :-
1. यूरेनियम-235 :- परमाणु संयंत्रों में ईंधन के रूप में उपयोग होता है। इससे परमाणु ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।
2. कोबाल्ट-60 :- कैंसर के इलाज में विकिरण चिकित्सा (radiotherapy) के लिए प्रयोग किया जाता है।
3. आयोडीन-131 :- घेघा (goitre) और थायरॉयड से जुड़ी बीमारियों के उपचार में उपयोग होता है।
4. कार्बन-14 (C-14) :- प्राचीन जीवाश्मों या वस्तुओं की उम्र जानने के लिए कार्बन डेटिंग पद्धति में प्रयोग होता है।
प्रश्न :- समभारिक किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :- समभारिक :- वे परमाणु होते हैं जो भिन्न-भिन्न तत्वों के होते हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, लेकिन उनकी परमाणु संख्या अलग-अलग होती है।
उदाहरण :-
1. कैल्शियम-40 (20Ca40) और 2. आर्गन-40 (18Ar40)
इन दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है, लेकिन परमाणु संख्याएँ अलग-अलग हैं (Ca = 20, Ar = 18), इसलिए ये समभारिक हैं।