Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 4
CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 4 : कार्बन एवं उसके यौगिक
प्रश्न :- कार्बन क्या है?
उत्तर :- कार्बन पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक तत्व है जिसे “C” से दर्शाया जाता है और इसका परमाणु क्रमांक 6 है। यह जीवन के लिए आवश्यक है। इस धरती पर सभी सजीव संरचनायें कार्बन पर ही आधारित है। रबड़, चमड़ा, कागज तथा प्लाष्टिक में कार्बन होता है।
नोट :-
इस धरती पर खनिज के रूप में कार्बन की उपस्थिति 0.02% है तथा वायुमंडल में (कार्बनडाई ऑक्साइड के रूप में) 0.03%।
प्रश्न :- कार्बन तथा उसके यौगिकों के उपयोग के बारे में बताइए।
उत्तर :- कार्बन तथा उसके यौगिकों के उपयोग निम्नलिखित है :-
1. प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम में कार्बन के यौगिक होते हैं। इसलिए अधिकतर इनका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।
2. कार्बन जलने के बाद मध्यम तापमान के साथ अधिकतम कैलोरी प्रदान करता है, तथा इनके दहन से न तो कोई हानिकारक गैस उत्पन्न होती है और न ही कोई अवशेष बचता है।
प्रश्न :- कार्बन का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास क्या है?
उत्तर :- कार्बन का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास K – 2, तथा L – 4 है।
प्रश्न :- कार्बन आदर्श अथवा उत्कृष्ट गैस विन्यास को कैसे प्राप्त करता है?
उत्तर :- कार्बन अपने दूसरे तत्वों के परमाणुओं अथवा अपने खुद के परमाणुओं से संयोजक इलेक्ट्रोनों की साझेदारी करके आदर्श अथवा उत्कृष्ट गैस विन्यास को प्राप्त करता है।
प्रश्न :- कौन कौन से तत्व के परमाणु इलेक्ट्रोन साझेदारी करने में सक्षम है?
उत्तर :- H, He, C, N, O, F, Na, Cl, Si, P, तथा S जैसे तत्वों के परमाणु इलेक्ट्रोन साझेदारी करने में सक्षम है।
प्रश्न :- सहसंयोजी आबंध की क्या परिभाषा है?
उत्तर :- सहसंयोजी आबंध :- वह आबंध है जो दो परमाणुओं के मध्य होता है, यह आबंध इलेक्ट्रॉनों के एक युग्म के साझा करने से बनते हैं, जिससे दोनों परमाणु स्थिरता प्राप्त करते हैं।
प्रश्न :- सहसंयोजी आबंध के भौतिक गुणोें को लिखिए।
उत्तर :- सहसंयोजी आबंध यौगिक :- सहसंयोजी आबंध यौगिकों के मध्य अन्तराणुक बल कम होने के कारण इनका गलनांक तथा क्वथनांक कम होता है। इन अणुओं में आवेशित कण न बनने के कारण ये अणु विद्युत के कुचालक होते है।
प्रश्न :- कार्बन के अपरूपों के बारे में बताइए।
उत्तर :- कार्बन के अपरूप :- ये कार्बन के ही विभिन्न रूप है, जिनमें कार्बन के तत्व अपने विभिन्न रासायनिक एवं भौतिक गुणों के साथ विद्यमान होता है। इनके तीन मुख्य अपरूप निम्नलिखित है :-
1. हीरा
2. ग्रेफाइट
3. फुलेरीन अथवा फुलरीन
नोट :-
1. आप जानते है हीरा तथा ग्रेफाइट दोनों की उत्पत्ति कार्बन से ही है। इनके भौतिक गुण तो भिन्न-भिन्न होते है, परंतु इनके रासायनिक गुण एक समान है।
2. हीरा एक दृढ़ त्रिआयामी संरचना बनाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि हीरे के भीतर कार्बन का हर एक परमाणु कार्बन के चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंधित होता है।
3. ग्रेफाइट एक षट्कोणीय व्यूह सरंचना का निर्माण करता है, ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रेफाइट के भीतर कार्बन का हर एक परमाणु उसके अन्य तीन परमाणुओं के साथ एक के ऊपर एक, समान तल पर होता है। और यह तल भी एक दूसरे के ऊपर व्यवस्थित होते है।
प्रश्न :- हीरे तथा ग्रेफाइट में तीन मुख्य अंतर बताईए।
उत्तर :- हीरे तथा ग्रेफाइट में तीन मुख्य अंतर निम्नलिखित है :-
हीरा | ग्रेफाइट |
हीरा एक कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। | ग्रेफाइट कोमल होता है। |
हीरा ऊष्मा का सुचालक तथा विद्युत का कुचालक होता है। | ग्रेफाइट ऊष्मा तथा विद्युत दोनो का सुचालक होता है। |
हीरा पारदर्शी पदार्थ है। | ग्रेफाइट अपारदर्शी पदार्थ है। |
प्रश्न :- कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति के क्या कारक है?
उत्तर :- कार्बन की सर्वतोमुखी अथवा सहसंयोजी आबंध प्रकृति के निम्नलिखित दो मुख्य कारक है, जिसके कारण कार्बन में अत्याधिक संख्या में यौगिकों का निर्माण करने की क्षमता होती है,
1. श्रृंखलन
2. चतुः संयोजकता
1. श्रृंखलन:- कार्बन अपने ही अन्य परमाणुओं के साथ आबन्ध बनाकर एक बड़ी श्रृंखला का निर्माण करते है, जिससे बड़ी संख्या में अणुओं का निर्माण होता है। यह गुण श्रृंखलन कहलाता है। श्रृंखलन के कारण कार्बन यौगिको की संख्या बहुत बढ़ जाती है।
2. चतुः संयोजकता :- कार्बन एकल संयोजी तत्वों के परमाणुओं अथवा अपने ही अन्य चार परमाणुओं के साथ आसानी से आबन्ध बना लेता है। क्योंकि कार्बन चतुःसंयोजन प्रकृति का पदार्थ है। इस कारण भी कार्बन के यौगिकों की संख्या बहुत बढ़ जाती है।
प्रश्न :- संतृप्त यौगिक से आप क्या समझते है?
उत्तर :- संतृप्त यौगिक :- एकल बंध वाले रासायनिक यौगिक संतृप्त यौगिक होते है। इन यौगिकों में डबल या ट्रिपल बंध नहीं होते है।
प्रश्न :- असंतृप्त यौगिक से आप क्या समझते है?
उत्तर :- असंतृप्त यौगिक :- डबल या ट्रिपल बंध वाले कार्बन के यौगिक असंतृप्त यौगिक होते है।
प्रश्न :- हाइड्रोकार्बन से आप क्या समझते है?
उत्तर :- हाइड्रोकार्बन :- उन रासायनिक यौगिको को कहा जाता है जो केवल हाइड्रोजन तथा कार्बन से मिलकर बने होते है। इन्हे एल्केन्स भी कहा जाता है।
उदहारण :-
मीथेन (CH4), एथेन (C2H6), प्रोपेन (C2H8)
प्रश्न :- एथेन, एथीन, और एथाइन क्या है? इनके रासायनिक सूत्र भी लिखिए।
उत्तर :- एथेन, एथीन, और एथाइन कार्बन तथा हाइड्रोजन के द्वारा निर्माण किये जाने वाले यौगिक है, जिनके रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-
1. एथेन :- C2H6
2. एथीन :- C2H4
3. एथाइन :- C2H2
प्रश्न :- संरचनात्मक समावयव क्या है?
उत्तर :- संरचनात्मक समावयव:- इन यौगिक के आणविक सूत्र एक समान होते हुए भी इनकी संरचनाए भिन्न-भिन्न होती है।
प्रश्न :- विषम परमाणु कौन से परमाणुओं को कहते है?
उत्तर :- विषम परमाणु :- उन परमाणुओं को कहते हैं जो किसी यौगिक में कार्बन (C) तथा हाइड्रोजन (H) के अलावा अन्य तत्वों के रूप में मौजूद होते हैं। विषम परमाणु जैसे ऑक्सीजन (O), नाइट्रोजन (N), सल्फर (S), फ्लोरीन (F) आदि हो सकते हैं।
उदाहरण :-
1. एथेनॉल (C2H5OH): इस यौगिक में ऑक्सीजन (O) एक विषम परमाणु है।
2. अमोनिया (NH3): इसमें नाइट्रोजन (N) विषम परमाणु है।
3. हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S): इसमें सल्फर (S) विषम परमाणु है।
नोट :-
मुख्य रूप से ये परमाणु कार्बन-हाइड्रोजन संरचना के बाहर होते हैं और उन यौगिकों के गुणधर्म को प्रभावित करते हैं। ये परमाणु रासायनिक यौगिकों की प्रतिक्रिया, स्थिरता, और गुणधर्मों में महत्वपूर्ण होता है।
प्रश्न :- प्रकार्यात्मक समूह क्या है?
उत्तर :- प्रकार्यात्मक समूह :- विषम परमाणुओं समेत वे सभी परमाणुओं के समूह जो कार्बन के विभिन्न यौगिकोें को विशिष्ट गुण एवं क्रियाशीलता प्रदान करते हैं, प्रकार्यात्मक समूह कहलाते है।उदाहरण :-
हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) :- जब एक हाइड्रॉक्सिल समूह कार्बन के किसी यौगिक से जुड़ता है, तो वह यौगिक शराब बन जाता है। अर्थात् यह समूह शराबों (alcohols) में पाया जाता है।
प्रश्न :- समजातीय श्रेणी किस श्रेणी को कहते हैं?
उत्तर :- समजातीय श्रेणी :- वह श्रृंखला है, जिसमें कार्बन श्रृंखला के हाइड्रोजन परमाणु एक समान प्रकार के प्रकार्यात्मक समूह से प्रतिस्थापित होते हैं, उसे समजातीय श्रेणी कहा जाता है।
उदाहरण :-
1. मिथेन (CH4)
2. एथेन (C2H6)
3. प्रोपेन (C3H8)
4. ब्यूटेन (C4H10)
5. पेंटेन (C5H12)
प्रश्न :- समजातीय श्रेणी की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर :- समजातीय श्रेणी की निम्नलिखित विशेषताएँ है :-
1. समजातीय श्रेणी में अगला यौगिक प्रत्येक पिछले यौगिक से केवल (एक मेथिलीन समूह) CH₂ अधिक होता है।
2. समजातीय श्रेणी में प्रकार्यात्मक समूहों की विशिष्टताओं के कारण इनके भौतिक गुणधर्मों में व्यवस्थित अंतर तथा एक समान रासायनिक गुणधर्म पाया जाता है।
3. समजातीय श्रेणी में अणु द्रव्यमानों में अंतर होता है। इसी के कारण इनके भौतिक गुणधर्मों में भी अंतर होता है।
4. समजातीय श्रेणी में अणु द्रव्यमानों के वृद्धि के कारण इनके सदस्यों का क्वथ्नांक तथा गलनांक भी बढ़ता है।
प्रश्न :- समजातीय श्रेणी में कार्बन योगिकों का नामकरण किस प्रकार किया जाता है, इसकी नामपद्धति के बारे में बताइए।
उत्तर :- किसी समजातीय श्रेणी में यौगिकों के नामकरण का आधार उन मूल कार्बन श्रृंखलाओं पर होता है, जिन्हें प्रकार्यात्मक समूह की प्रकृति के आधार पर उपसर्ग या प्रत्यय के माध्यम से संशोधित किया जाता है।
प्रश्न :- कार्बन यौगिकों के कौन कौन से रासायनिक गुणधर्म होते हैं।
उत्तर :- कार्बन यौगिकों के निम्नलिखित रासायनिक गुणधर्म होते हैं :-
1. वायु में दहन के पश्चात् ये यौगिक CO2 तथा H2O उत्पन्न करते हैं तथा अत्याधिक मात्रा में प्रकाश तथा ऊष्मा भी उत्पन्न करते हैं।
2. वायु की सीमित मात्रा में संतृप्त हाइड्रोकार्बन को जलाने पर यह कज्जली (काली) ज्वाला उत्पन्न करता है, जबकि इसी संतृप्त हाइड्रोकार्बन को वायु की अत्याधिक मात्रा में जलाने पर यह नीली ज्वाला उत्पन्न करता है।
3. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को वायु में दहन करने से हमें कज्जली काली ज्वाला देखने को मिलती है। क्योंकि ये हाइड्रोकार्बन अक्सर अपूर्ण दहन की स्थिति उत्पन्न करते है, ऐसा इसलिए क्योंकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में डबल या ट्रिपल आबंध होते हैं, जिसके कारण इनका दहन पूरी तरह से नहीं हो पाता है, अर्थात् यह पूरी तरह से नहीं जलते है, जिसके कारण ऐसा देखने को मिलता है।
4. अम्लीय वर्षा (acid rain) का कारण सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड होते हैं। जो कि कोयला और पेट्रोलियम के दहन से उत्पन्न होते हैं।
प्रश्न :- किन पदार्थों को ऑक्सीकारक पदार्थ कहा जाता है।
उत्तर :- ऑक्सीकारक पदार्थ :- वे पदार्थ जो अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन प्रदान करने की क्षमता रखते हैं, ऑक्सीकारक पदार्थ कहलाते है।
उदाहरण :-
1. कैल्शियम परमैंगनेट (CaO2)
2. हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H2O2)
प्रश्न :- ऑक्सीकरण अभिक्रिया के अन्तर्गत यौगिकों में कौन से परिवर्तन आते हैं?
उत्तर :- ऑक्सीकरण अभिक्रिया के अन्तर्गत यौगिकों में निम्नलिखित परिवर्तन आते हैं :-
1. ऑक्सीजन का संयोग होना।
2. हाइड्रोजन का पृथक होना।
3. इलेक्ट्रॉनों का नुकसान होना।
4. ऑक्सीकरण अवस्था का बढ़ जाना।
उदाहरण :-
- एथेनाॅल अम्ल से एथेनोइक अम्ल में परिवर्तन होना।
- इस परिवर्तन में ऑक्सीजन के संयोग होने के साथ-साथ हाइड्रोजन का पृथक होना पाया जाता है।
प्रश्न :- संकलन अभिक्रिया क्या है?
उत्तर :- संकलन अभिक्रिया :- इसे संयोग अभिक्रिया भी कहते हैं, इसके अन्तर्गत दो या दो से अधिक सरल यौगिकों के मिलने से एक जटिल यौगिक का निर्माण होता है।
उदाहरण :-
1. निकेल, पैलडियम या प्लैटिनम के उत्प्रेरक के रूप में उपस्थित होने पर असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके संतृप्त हाइड्रोकार्बन का निर्माण करते हैं।
2. इसी अभिक्रिया द्वारा वनस्पति तेल को वनस्पति घी में परिवर्तित करते हैं।
नोट :-
प्रश्न :- प्रतिस्थापन अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- प्रतिस्थापन अभिक्रिया :- उन अभिक्रियाओं को प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहा जाता है, जिनमें एक परमाणु या परमाणुओं का समूह दूसरे का स्थान लेता है।
उदाहरण :-
संतृप्त हाइड्रोकार्बन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के मुकाबले अत्यधिक स्थिर और अधिकांश अभिकर्मकों के संपर्क में अक्रिय रहते हैं। हालांकि, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में तीव्र अभिक्रिया के दौरान, क्लोरीन हाइड्रोकार्बन के साथ संकलित होती है। क्लोरीन, हाइड्रोजन परमाणुओं का एक-एक करके प्रतिस्थापन करती है। इसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित हैः-
CH4 + Cl2 [(hν)→] CH3Cl + HCl
प्रश्न :- एथेनाॅल के भौतिक गुणधर्मों को लिखिए।
उत्तर :- एथेनाॅल के भौतिक गुणधर्म निम्नलिखित हैं :-
1. यह रंगहीन होता है
2. इसमें से गंध आती है और इसका स्वाद जलने वाला होता है
3. यह जल में घुलनशील होता है
4. इसका क्वथ्नांक 351K तथा गलनांक 156K होता है
5. यह उदासीन प्रकृति का होता है
प्रश्न :- एथेनाॅल के रासायनिक गुणधर्मों को लिखिए।
उत्तर :- एथेनाॅल के रासायनिक गुणधर्म निम्नलिखित हैं :-
1. एथेनाॅल (C2H5OH) सोडियम (Na) के साथ अभिक्रिया करके सोडियम इथाॅक्साइड (C2H5ONa) एवं हाइड्रोजन (H) बनाता है।
इसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-
2C2H5OH + 2Na → 2C2H5O-Na + H2
2. एथेनॉल (C2H5OH) सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4) के साथ अभिक्रिया करके एथीन (C2H4) और जल (H2O) बनाता है। इसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-
C2H5OH → C2H4 + H2O
प्रश्न :- एथेनाॅल के पाँच उपयोगों के बारे में बताइए।
उत्तर :- एथेनाॅल के पाँच उपयोग निम्नलिखित हैं :-
1. एल्कोहल, बीयर और वाइन जैसी नशीली पेय पदार्थों को बनाने में
2. ईंधन के रूप में भी एथेनाॅल का उपयोग किया जा सकता है
3. दवाओं तथा टाॅनिकों को बनाने के लिए
4. प्रयोगशाला तथा शोध अनुप्रयोगों के रूप में
5. काॅस्मेटिक्स वस्तुओं के निर्माण में
प्रश्न :- एथेनाॅइक अम्ल (एसीटिक एसिड) के भौतिक गुणधर्मों को लिखिए।
उत्तर :- एथेनाॅइक अम्ल (एसीटिक एसिड) के भौतिक गुणधर्म निम्नलिखित हैं :-
1. यह रंगहीन द्रव होता है
2. इसमें से सिरके जैसी गंध आती है और इसका स्वाद खट्टा होता है
3. इसका क्वथ्नांक 391K तथा गलनांक 290K होता है
नोट :-
1. 3%-4% एथेनाॅइक अम्ल (एसीटिक एसिड) के जलीय विलयन को सिरका कहते है।
2. ठंडा होने पर शुद्ध एथेनॉइक अम्ल (एसीटिक एसिड) बर्फ की तरह ठोस रूप में जम जाता है, इस कारण इसे ग्लैशियल एसीटिक अम्ल कहा जाता है।
प्रश्न :- एथेनाॅइक अम्ल (एसीटिक एसिड) के रासायनिक गुणधर्मों को लिखिए।
उत्तर :- एथेनाॅइक अम्ल (एसीटिक एसिड) के रासायनिक गुणधर्म निम्नलिखित हैं :-
1. एस्टर अभिक्रिया:- यह अल्कोहल (जैसे एथेनॉल) के साथ एस्टर अभिक्रिया में भाग लेता है, जिससे एसीटेट एस्टर (जैसे एथाइल एसीटेट) और पानी का निर्माण होता है। इसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-
CH3COOH + C2H5OH → CH3COOC2H5 + H2O
2. एथेनाॅइक अम्ल की क्षारक के साथ अभिक्रिया :- जब एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) के साथ अभिक्रिया करता है, तो सोडियम एथेनोएट (CH3COONa) और जल (H2O) उत्पन्न होते हैं। इसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित हैः-
CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
3. एथेनाॅइक अम्ल की कार्बोनेट एवं हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया :- एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) , कार्बोनेट (CO32–) और हाइड्रोजनकार्बोनेट (HCO33–) के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एसीटेट (CH3COONa), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जल (H2O) उत्पन्न करता है। इसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित हैः-
2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + CO2 + H2O
प्रश्न :- साबुन के मुख्य रासायनिक गुणों के बारे में बताइए।
उत्तर :- साबुन के मुख्य रासायनिक गुण निम्नलिखित है :-
1. साबुन, एसे यौगिक हैं जो लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम अथवा पोटाशियम लवण के रूप में पाए जाते हैं। आमतौर पर ये सफाई के लिए उपयोग किए जाते हैं।
2. कठोर जल में साबुन का प्रभाव समाप्त हो जाता है, जबकि मृदु जल में साबुन सफाई की क्रिया करता है।
3. साबुन के अणुओं में दो समूह होते हैं :-
(i) जल को आकर्षित करने वाला जलरागी (hydrophilic) (जल में विलेय होने वाला सिरा) और
(ii) जल से बचने वाला समूह होता है जलविरागी (hydrophobic), (हाइड्रोकार्बन में विलेय होने वाला सिरा) जो इसे सफाई क्रिया में प्रभावी बनाता है।
प्रश्न :- अपमार्जक के मुख्य रासायनिक गुणों के बारे में बताइए।
उत्तर :- अपमार्जक के मुख्य रासायनिक गुण निम्नलिखित है :-
1. लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल (R-COOH) के सल्फोनेट (R-SO3–) और अमोनियम (NH4+) लवण होते हैं।
2. अपमार्जक मृदु तथा कठोर जल दोनों के साथ सफाई क्रिया करने में सक्षम होते हैं।
नोट :-
1. कार्बोक्सिलिक अम्ल (R-COOH) तथा सल्फोनेट (R-SO3–) में, R = अल्काइल (alkyl) अथवा एरोमैटिक (aromatic) समूह।
2. अपमार्जक के अणुओं के आवेशित सिरे की वजह से कठोर जल में कैल्शियम (Ca) और मैग्नीशियम (Mg) आयन अघुलनशील पदार्थ के रूप में बदलने या प्रतिक्रिया करने में सक्षम नहीं होते हैं। जिससे सफाई की प्रक्रिया अच्छे प्रभावी तरीके से होती है।
प्रश्न :- मिसेल संरचना क्या है? समझाइए।
उत्तर :- जल में अणुओं की विशेष व्यवस्था होती है, जिसमें हाइड्रोकार्बन सिरा जल के बाहर स्थित रहता है। इस व्यवस्था में, अणुओं का एक बड़ा समूह (गुच्छा) बनता है, जिसमें जलविरागी पूंछ समूह (गुच्छे) के अंदर होती है, जबकि उसका आयनिक सिरा समूह (गुच्छे) की सतह पर होता है। इस संरचना को मिसेल कहा जाता है।
प्रश्न :- साबुन की सफाई प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर :- साबुन की सफाई प्रक्रिया निम्नलिखित है :-
1. ज्यादातर मैल तैलीय होता है, जिसमें जलविरागी हिस्सा इस तैलीय मैल के संपर्क में आ जाता है।
2. जलरागी हिस्से को जल के अणु अपने चारों ओर लपेट लेते हैं।
3. इस प्रक्रिया के फलस्वरूप, साबुन के अणु मिलकर मिसेली संरचना बनाते हैं।
4. इस प्रक्रिया में साबुन के अणु तैलीय मैल के साथ मिलकर पायस का रूप लेते हैं, जिसे विभिन्न भौतिक विधियों जैसे पीटने, रगड़ने या बुश से धोने से वस्त्र साफ होते हैं।
प्रश्न :- अघुलनशील पदार्थ अथवा स्कम क्या है?
उत्तर :- कठोर जल में कैल्शियम (Ca) तथा मैग्नीशियम (Mg) के लवण साबुन के जलरागी सिरों के साथ प्रतिक्रिया करती है तथा अघुलनशील पदार्थ अथवा स्कम का निर्माण करते हैं, जिससे सफाई प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
प्रश्न :- साबुन तथा अपमार्जक में अंतर बताइए।
उत्तर :- साबुन तथा अपमार्जक में निम्नलिखित अंतर है।
साबुन | अपमार्जक |
साबुन पूरी तरह से जैव निम्नकरणीय होते हैं। | अपमार्जक पूरी तरह से जैव निम्नकरणीय नहीं होते हैं। |
साबुन पर्यावरण के हितैसी होते है। ये पर्यावरण में प्रदूषण या हानि नहीं पहुँचाते है। | साबुन पर्यावरण के हितैसी नहीं होते है। |